2. प्रांतीय कार्यपालिका - Page 43

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

का दंड भोगना पड़ेगा। ये गुट नए - नए गठबंधन करके प्रशासन को अस्थिर बनाए रखेंगे और विचारों की नीति की उपेक्षा जोड़तोड़ की नीति को तरजीह देकर प्रशासन के काम की निष्ठा पर घातक प्रभाव डालेंगे। संयुक्त उत्तरदायित्व के अंतर्गत कोई दल विभिन्न विचारधाराओं वाली कई इकाइयों का समूह हो सकता है। प्रत्येक इकाई के सदस्य न केवल एकीकृत नीति तैयार करने के लिए बाध्य होंगे, बल्कि उससे जुड़े रहने के लिए भी मजबूर होंगे। दल का कार्यक्रम गुट के कार्यक्रम से अधिक व्यापक होता है। जो लोग भारत की स्थिति को समझते हैं वे दल के कार्यक्रम का पालन करने की आदत से जो शिक्षा मिलती है, उसकी जरूरत को महसूस करते हैं।

  1. संयुक्त उत्तरदायित्व कैसे प्राप्त किया जाए यह एक महत्वपूर्ण बात है। सुस्पष्ट कानूनी व्यवस्था द्वारा ऐसा करने से प्रशासन के प्रमुख या विधायिका की पूरी कार्यपालिका को बर्खास्त किए बिना किसी मंत्री को बर्खास्त करने की आजादी समाप्त हो जाएगी। अतः इसे परिपाटी के लिए छोड़ देना बेहतर होगा। अब भी प्रश्न बना रहता है कि परिपाटी को व्यवहार में कैसे लाया जाए। मुझे लगता है कि यदि गवर्नर द्वारा मंत्रियों का चुनाव किए जाने के स्थान पर किसी मंत्री को ही अपने साथी चुनने का काम सौंप दिया जाए, तो इस प्रकार बनी कैबिनेट संयुक्त उत्तरदायित्व के आधार पर काम करने के लिए बाध्य होगी।

इससे मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों को बदले बिना किसी विशेष मंत्री को हटाने की गुंजाइश भी बनी रहेगी। अतः मेरा सुझाव है कि गवर्नर को हिदायत दी जाए कि वह सीधे ही अलग - अलग मंत्रियों की नियुक्ति न करके एक मुख्यमंत्री को चुने और सरकार बनाने का काम उस पर छोड़ दे।

  1. मेरे साथियों ने सिफारिश की है कि प्रेसिडेंसी के प्रशासन के लिए 7 मंत्री होने चाहिएं। जहाँ तक मंत्रियों की संख्या निश्चित करने का संबंध है, मैं इस सिफारिश से सहमत नहीं हूँ। हो सकता है कि प्रेसिडेंसी की भावी सरकार 7 से कम मंत्रियों से काम चला सके या 7 से अधिक मंत्रियों की आवश्यकता महसूस करे। चूँकि विधायिका के सदस्यों के समर्थन के बिना प्रांत में सरकार चलाना संभव नहीं है, अतः हो सकता है कि विधायिका के सदस्यों की व्यक्तिगत आकांक्षाएं पूरी करने के लिए सरकार को बिना विभाग के मंत्री नियुक्त करने पड़ें। इन परिस्थितियों में मुझे तो यही ठीक लगता है कि मंत्रियों की संख्या का प्रश्न तत्कालीन विधायिका के फैसले के लिए ही छोड़ देना चाहिए।
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गवर्नर की स्थिति और अधिकार

  1. मौजूदा संविधान के अंतर्गत प्रांत के गवर्नर की स्थिति सुस्पष्ट नहीं है। प्रांत की सरकार के प्रति बिना किसी उत्तरदायित्व के वह प्रांत में क्राउन (ब्रिटिश सम्राट) का