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प्रांतीय कार्यपालिका

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लिए उल्लिखित सिद्धांतों का उल्लंघन न करें। यह काम करने के लिए उसे स्थानीय राजनीति से अलग - थलग रहना चाहिए। पक्षपातरहित पर्यवेक्षण के लिए यह अलगाव नितांत आवश्यक है। उसे अलग रखने का सबसे अच्छा तरीका कार्यपालिका से अलग रखना है। राजनीतिक विवादों में प्रत्यक्ष रूप से गवर्नर का भाग लेना, उसके निष्पक्ष निर्णय के प्रति जनता के विश्वास को जितनी ठेस पहुँचाएगा, उतनी ठेस और कोई चीज नहीं पहुँचाएगी। इसमें कोई शक नहीं है कि विधायिका और कार्यपालिका के बीच के विवादों से उसके संबंध का जनता पर वैसा ही प्रभाव पड़ेगा। यदि गवर्नर को अपना कार्य इस प्रकार करना है कि वह न्यायसंगत प्रतीत हो, तो उसका दलगत भावना से ऊपर उठना बहुत जरूरी है। इस उद्देश्य से उसे कार्यपालिका से वैसे ही मुक्त कर देना चाहिए जैसे विधायिका से अलग किया गया है। अतः मैं सिफारिश करता हूँ कि गवर्नर को न तो कार्यपालिका का भाग होना चाहिए और न ही उसे इसकी अध्यक्षता का अधिकार होना चाहिए। गवर्नर के हस्तक्षेप के बिना प्रधानमंत्री कार्यपालिका की बैठकें बुलाएगा और उनकी अध्यक्षता करेगा।