3. प्रांतीय विधायिका - Page 82

प्रांतीय विधायिका

वर्ग मीलों में जन - 1925 - 26 परिषद् में

क्षेत्रफल संख्या में लगान सीटों की

की मांग वर्तमान संख्या

महाराष्ट्र 47,854 8,536,217 2,18,181,55 25 गुजरात 10,118 2,958,849 99,41,264 16 कर्नाटक 10,870 3,188,523 82,91,225 8 सिंध 46,506 3,279,377 1,03,85,031 19

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  1. उपरोक्त तालिका से स्पष्ट हो जाता है कि असमानताएं कितनी उजागर हैं। जनसंख्या को आधार माना जाए, तो महाराष्ट्र और कर्नाटक का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। यदि गुजरात के प्रतिनिधित्व को एक मानक रूप में लिया जाए, तो महाराष्ट्र को 48 और कर्नाटक को 17 सीटें मिलनी चाहिएं। यदि लगान को भी बंटवारे का आधार माना जाए, तो महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ नितांत अन्यायपूर्ण बर्ताव हुआ है। उस आधार पर भी महाराष्ट्र को 32 और कर्नाटक को 15 सीटें मिलनी चाहिएं। यह मांग कोरी भावनात्मक मांग या सुनिश्चित निर्वाचकीय प्रतिसाम्य की मांग नहीं है। इसके पीछे पर्याप्त सैद्धान्तिक औचित्य है। क्योंकि ऐसी प्रणाली में जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र में एक वोट की कीमत ज्यादा है और दूसरे में कम है, तो उस पर आपत्ति की जा सकती है कि अपने शासकों के चयन में समुदाय के प्रत्येक सदस्य का हिस्सा शेष लोगों में से प्रत्येक के मुकाबले बराबर नहीं है। यदि सभी वोटों के शत - प्रतिशत समान मूल्य के सिद्धान्त को राजनीतिक न्याय का मूल सिद्धान्त न माना जाए तो, भी इस प्रकार के विभेद ऐसे दुष्परिणाम पैदा करते ही हैं कि देश के किसी एक भाग या मत समूह या हित - समूह को अधिक प्रतिनिधित्व दे दिया जाए और दूसरे ऐसे समूह का अहित हो जाए। अनुभव से यह पता चलता है कि सीटों के वर्तमान बंटवारे के कारण प्रेसिडेंसी के कतिपय भागों में विधायी तथा प्रशासी कार्य के गुरुत्व केन्द्र का अनुचित विभाजन हो गया है और उससे प्रेसिडेंसी के अन्य भागों को क्षति हुई है। उसका नतीजा यह निकला है कि अन्य भागों को अनजाने में सरकारी रियायत और ध्यान के काफी बड़े अंश से वंचित कर दिया गया है। इस व्यावहारिक दृष्टिकोण के आधार पर सीटों का वर्तमान बंटवारा ऐसी शिकायत है, जिसके औचित्य को नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान स्थिति में कर्नाटक और महाराष्ट्र प्रांत की सरकार पर कभी भी वह प्रभाव नहीं डाल सकते हैं। इसलिए इस आशंका का प्रबल कारण है कि वह कटुता घटने के बजाए बढ़ती ही जाएगी और तीव्र से तीव्रतर होती जाएगी। इसलिए यह उचित ही होगा कि जब हम एक प्रतिनिधि और उत्तरदायी सरकार बनाने के लिए प्रशासन तंत्र का आमूल परिवर्तन कर रहे हैं, तो इस शिकायत को भी दूर