3. प्रांतीय विधायिका - Page 84

प्रांतीय विधायिका

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के लिए जनसंख्या ही एकमात्र सही और न्यायसंगत मापदंड है। इसलिए यही मापदंड इंग्लैंड और अन्य ऐसे सभी देशों में अपनाया जाता है, जहां प्रतिनिधि शासन प्रणाली है और मैं यह सिफारिश करता हूँ कि बंबई विधान परिषद् के लिए सीटों का बंटवारा इसी आधार पर किया जाए। 3. सीटों के बंटवारे के अन्य पहलू

  1. मेरे साथियों ने अल्पसंख्यकों के बीच सीटों के बंटवारे के बारे में जो प्रस्ताव किया है, उसमें सिद्धान्त का जो अभाव साफ तौर पर दीख पड़ता है, वह सीटों के उस बंटवारे में भी दीख पड़ता है, जो उन्होंने पूंजीपतियों और श्रमिकों के बीच बंटवारे के लिए किया है। वाणिज्य तथा उद्योग के माध्यम से प्रतिनिधित्व पाने वाले पूंजीपतियों को उन्होंने 11 सीटें दी हैं, जबकि श्रमिकों को उन्होंने 4 सीटें दी हैं। काश्तकारों को वे कुछ नहीं देते, सिवाय उसके, जो उन्हें आम चुनाव के जरिये

खुरचन के रूप में मिल जाता है। जमींदारों को वे 5 सीटें देते हैं। लेकिन यह बात सही नहीं है, क्योंकि यदि हम सिंध के सदस्यों और प्रेसिडेंसी के अन्य सदस्यों को भी आंकलन में शामिल करें, तो परिषद् में जमींदारों के लिए सीटों की संख्या सहज ही 40 तक पहुंच जाती है। न ही यह कहा जा सकता है कि मेरे साथियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच सीटों के सही बंटवारे के सवाल की ओर पर्याप्त ध्यान दिया है। इस समय विधायिका बहुत अधिक ग्रामीण वर्गों की बैसाखी पर निर्भर है और इस बात का भारी खतरा है कि काश्तकारों के नाम पर सरकारी सत्ता का अनुचित लाभ उठाया जाए और स्थायी बंदोबस्त, सस्ती आबपोशी और निःशुल्क वनों जैसी खतरनाक सनकों को पूरा करने के लिए कानून बना दिया जाए। यदि ऐसी सनक को विधि - पुस्तिका में स्थान नहीं देना है, तो जरूरी है कि उन शहरी वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए, जिनका प्रतिनिधित्व उनकी योग्यता और योगदान के अनुरूप नहीं है। बेहतर तो यह होता कि मेरे साथी प्रेसिडेंसी में विभिन्न भागों के बीच के सीटों के उचित वितरण का काम एक अलग समिति के ऊपर छोड़ देते। मैं नहीं कह सकता कि उन्होंने कमजोर पक्षों को न्याय देने के मामले में सफलता प्राप्त की है। मेरा सुझाव है कि इस समस्या से निपटने के लिए एक अलग समिति बना दी जाए। 4. सीटें और आवासीय योग्यता

  1. बंबई निर्वाचन नियम 6 (1) (ख) के अनुसार विधान परिषद् के निर्वाचन के उम्मीदवारों के लिए आवासीय योग्यता निर्धारित की गई है। इस नियम में कहा गया है कि ‘‘सामान्य निर्वाचन - क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के वास्ते परिषद् के सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिए कोई ऐसा व्यक्ति तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि उसने निर्वाचन - क्षेत्र में उम्मीदवारों के मनोनयन के लिए नियत अंतिम तिथि से तुरंत पूर्व 6 महीने की अवधि तक निर्वाचन - क्षेत्र में शामिल निर्वाचन - क्षेत्र अथवा डिवीजन में किसी