3. प्रांतीय विधायिका - Page 85

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

भाग में निवास न किया हो।’’ इस प्रेसिडेंसी में इस नियम का निर्वचन इस प्रकार किया गया है कि इससे पूर्व कि कोई उम्मीदवार निर्वाचन - क्षेत्र विशेष से चुनाव के लिए खड़ा हो सके, उसके लिए जरूरी है कि उसने निर्वाचन - क्षेत्र में वास्तव में या नियमित रूप से निवास किया हो। (यह नहीं कि वह मात्र उसका निवास - स्थान हो और वह वहां यदाकदा आता जाता रहा हो।) मैं इस प्रश्न का संक्षिप्त इतिहास बताना चाहूंगा, जहां तक उसका संबंध इस प्रेसिडेंसी से है, संयुक्त रिपोर्ट के पैरा 84 में इस तथ्य पर टिप्पणी की गई है कि तत्कालीन निर्वाचन प्रणाली का एक उल्लेखनीय परिणाम यह है कि कानूनी पेशे के अधिकांश लोग चुनावों में सफल हुए हैं। उसमें यह भी कहा गया कि एक पेशे के लोगों का राजनीति इतना अधिक प्रभुत्व जनसाधारण के हित में नहीं है। उसमें सुझाव दिया गया कि नए निर्वाचन-क्षेत्रों का गठन करते समय एक महत्वपूर्ण उद्देश्य को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दूसरे वर्ग और व्यवसाय के लोग भी परिषद्ों में पर्याप्त संख्या में सीटें पा सकें और यह संभव हो सकता है, यदि ग्रामीण सीटों के लिए कोई निश्चित योग्यताएं निर्धारित की जाएं। साउथबरो कमेटी ने इस सवाल पर सावधानी से विचार किया। उसने अपनी रिपोर्ट के पैरा 29 में इस तथ्य का उल्लेख किया कि कुछ स्थानीय सरकारों ने अर्थात् संयुक्त प्रांत, बिहार, उड़ीसा और असम की स्थानीय सरकारों ने आवासीय योग्यता को शामिल किए जाने पर बल नहीं दिया, जब कि बंगाल, बंबई, मद्रास और पंजाब की सरकारों ने कहा कि यह नए निर्वाचन - क्षेत्र के भारी अनुपात के हितों के प्रतिकूल होगा कि उन व्यक्तियों को उम्मीदवार के रूप में स्वीकार किया जाए, जो उस क्षेत्र के निवासी न हों, जिसका वे प्रतिनिधित्व करना चाहते हों। साउथबरो कमेटी के बहुमत ने सिद्धांत रूप में आवासीय योग्यता का विरोध किया, परन्तु समझौते के रूप में उन्होंने समाधान निकाला कि मध्य प्रांत, बंबई और पंजाब में प्रतिबंध लगाया जाए, अन्य प्रांतों में नहीं। भारत सरकार ने साउथबरो कमेटी की सिफारिशों पर अपने विचार व्यक्त करते समय उन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। लेकिन कहा कि इस प्रश्न पर कमेटी के रवैये से उनके सामने कुछ कठिनाई इस अर्थ में आ गई है कि कमेटी ने एक ओर तो प्रतिबंध का समर्थन करने वाली कुछ स्थानीय सरकारों के दृष्टिकोणों को स्वीकार कर लिया पर दूसरी ओर उसने कुछ अन्य सरकारों के दृष्टिकोणों को अस्वीकार कर दिया, हालांकि उनका आग्रह भी उतना ही था। गवर्नमैंट आफ इंडिया बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति ने सिफारिश की कि मताधिकार समिति द्वारा प्रस्तावित सुलह समझौते की बात स्वीकार कर ली जाए। बात को स्वीकार कर लिया गया और केवल मध्य प्रांत, बंबई और पंजाब के बारे में आवासीय योग्यता लागू की गई। मैं बताना चाहूंगा कि इसके बाद 1923 के आम चुनावों के बाद नियमों का संशोधन करते समय पंजाब में यह आवासीय योग्यता समाप्त कर दी गई। पंजाब सरकार ने खुद मुडीमैन कमेटी को अपनी राय देते हुए कहा कि पहले आम चुनाव के लिए आवासीय योग्यता