82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
- संविधान संशोधन का अधिकार : प्रांतीय विधायिकाएं उस दस्तावेज की शर्तों से आबद्ध हैं, जिसके द्वारा उनका गठन हुआ है। उस दस्तावेज के अनुसार उन्हें ‘पूर्ण अधिकारों’ वाले ऐसे निकायों का रूप दिया गया है, जिन्हें अपने राज्य क्षेत्र में सभी व्यक्तियों के ऊपर प्रशासन का विशिष्ट और परिभाषित अधिकार प्राप्त है। उन्हें एक
खास क्षेत्र में और सरकार के परिभाषित अधिकार प्राप्त हैं। प्रशासन के पूर्ण अधिकारों में स्वभावतः संविधान संशोधन का अधिकार शामिल नहीं है। ऐसी कामना है कि प्रांतीय विधायिकाओं को संविधान सभा के अधिकार प्राप्त हों, ताकि वे अपने प्रांत के संविधान में संशोधन कर सकें। इस प्रस्ताव के पक्ष में बहुत कुछ कहा जा सकता है। संसद यदि प्रांत के लोगों को स्वराज दिए जाने की अनुमति दे दे, तो उसका अर्थ होगा कि प्रांत के लोगों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे अपनी पसंद की शासन प्रणाली चुनें। परन्तु यह माना ही जाना चाहिए कि कुछ अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो यह नहीं चाहेंगे कि उनके संवैधानिक अधिकारों को बहुसंख्यक तय करें। ऐसा ही होगा यदि प्रांतीय विधायकों को संविधान संशोधन का अधिकार दिया जाएगा। इसी प्रमुख कारण से कनाडा का संविधान कनाडा की संसद को संविधान परिवर्तन का कोई अधिकार नहीं देता। लेकिन दक्षिण अफ्रीका में इसकी मिसाल मौजूद है। वहां अल्पसंख्यकों का अहित किए बिना विधायिका संविधान में परिवर्तन कर सकती है। अतः इसका कोई कारण नहीं है कि हम दक्षिण अफ्रीका के उदाहरण पर न चलें। मेरी सिफारिश है कि प्रांत के संविधान संशोधन का अधिकार प्रांतीय विधायिकाओं को दिया जाए बशर्ते कि उसे विधायिका में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व संबंधी उपबंधों में संशोधन का कोई अधिकार न हो।
- ऐसा कानून पास करने के लिए क्या विशेष प्रक्रिया अपनाई जाए, यह निश्चित करना कठिन है। परन्तु फिर भी यह कहा जा सकता है कि संविधान संशोधन की प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि वह नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की काफी कठोरता से रक्षा करे, परन्तु साथ ही उसमें इतना लचीलापन भी रहे कि विकास और अस्तित्व दोनों को जीने के लिए जरूरी माना जाए, कदम उठाने से पहले विचार - विमर्श हो और अंतिम निर्णय बहुमत के शासन के सिद्धान्त के अनुरूप हो। मुझे सबसे अच्छा तरीका यही लगता है कि अलग-अलग संविधान संशोधनों के लिए अलग - अलग प्रकार की प्रक्रिया हो। मैं चाहता हूँ कि अल्प मूलभूत प्रकार के संविधान अंशों के संशोधनों के मुकाबले अधिक मूलभूत प्रकार के संविधान संशोधनों के लिए प्रक्रिया अधिक कठोर हो।