254 25-4-1948 मैं पत्थर की तरह मजबूत हूं, पिघलने वाला नहीं, आपका हाल अलग है, आप ढेले की तरह बिखर जाओगे - लखनऊ - Page 100

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पत्थर की तरह कड़ा होने के कारण मुझे पानी में अपने पिघल जाने का डर नहीं है। इसीलिए, काँग्रेस सरकार में शामिल होने के बावजूद मुझ पर कोई असर नहीं होने वाला। लेकिन आपकी स्थिति कुछ अलग है। पानी में गिरे ढेले की तरह आप घुल जाएंगे। वहां रहना मुश्किल है ऐसा महसूस होने पर मैं कभी भी वहां से बाहर निकल सकता हूं।

हालात ऐसे हैं कि आज राजनीति में अपने लोगों का होना आवश्यक हो गया है। अच्छे कानून से धोखे की संभावना नहीं होती यह बात सच है लेकिन अच्छे कानून को लागू करते वक्त धूर्तता बरती जाने की संभावना होती है। कानून लागू करते वक्त अस्पृश्यों के खिलाफ गलत बर्ताव की परंपरा रखने वालों के हाथ अगर अधिकार हों तो अपने भविष्य के लिए यह बात बुरी साबित हो सकती है।

जबरदस्ती परिश्रम कराने को कानून की सुरक्षा प्राप्त नहीं है, लेकिन जमींदार ऐसी व्यवस्था को लागू कर रहे हैं। कई जगहों पर अत्याचारी लोगों के रिश्तेदार अधिकार के पदों पर नियुक्त हुए हैं इसलिए उनके खिलाफ अस्पृश्यों द्वारा दी गई अर्जियां भी ये अधिकारी दबा देते हैं। अधिकार के इन पदों पर अगर अस्पृश्य लोग होते तो अपने बांधवों के हकों की वे जरूर रक्षा करते।

मैंने अगर काँग्रेस में प्रवेश करने का निर्णय लिया तो उसकी सार्वजनिक घोषणा करूंगा। उसमें अगर अस्पृश्यों के हित की बात हो तो मैं आपको भी वही करने की सलाह दूंगा। लेकिन, जब तक मैं आपको खुले आम काँग्रेस में जाने का आह्वान नहीं करता तब तक आप काँग्रेस में ना जाएं! इस सम्बोधन के साथ डॉक्टर बाबासाहेब ने अपना भाषण समाप्त किया।

विरोध के लिए विरोध करना मुझे मंजूर नहीं।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के इस भाषण का अलग ही गलत और झूठा अर्थ निकाल कर एक अखबार ने इस बारे में खबर प्रकाशित की। उस पर डॉ. बाबासाहेब ने अपना स्पस्टीकरण दिया। जनता के 8 मई, 1948 की प्रति में वह प्रकाशित हुआ है। उसमें वह कहते हैं-

मुझे बहुत खेद महसूस हुआ कि मेरे भाषण के अनुचित अर्थ निकाल कर एक स्थानीय अखबार ने खबर छापी है तथा उसमें यह भी लिखा गया है कि मंत्रिमंडल के अपने सहयोगी के बारे में मैंने कुछ अनुचित कहा।

मेरा 25 अप्रैल का भाषण स्वतःस्फूर्त था। अपने भाषण के कुछ मुद्दे मैं यहां दे रहा हूं। विभिन्न बिंदुओं को लेकर मेरे कुछ अनुयायियों द्वारा मुझ पर की गई टिप्पणियों के जवाब मैं दे रहा हूं -

पहला मुद्दा . त्रिमंत्री प्रतिनिधिमंडल जाने के साथ मैंने चुप्पी साध ली उसके पीछे