254 25-4-1948 मैं पत्थर की तरह मजबूत हूं, पिघलने वाला नहीं, आपका हाल अलग है, आप ढेले की तरह बिखर जाओगे - लखनऊ - Page 99

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उनके मन की आशंकाएं दूर करने की मैं कोशिश करने जा रहा हूं। यह कोई कांग्रेस की गुलामी नहीं बल्कि संसद में जाकर अपने समाज के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए, मैं कर रहा हूं।

अपनी घोषणा के अनुरूप यहां के हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, अस्पृश्य आदि को सत्ता सौंप कर अंग्रेज यहां से निकल नहीं गए हैं। शिमला परिषद में भी वाइसराय ने घोषणा की थी कि केवल काँग्रेस के हाथ में सत्ता नहीं सौंपी जाएगी। 1946 में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन ने प्राथमिक चुनाव जीते थे। विरोधियों को पूरी तरह परास्त करने के कारण फेडरेशन का प्रतिनिधि स्वरूप स्थापित हो चुका था। लेकिन बाद में अंग्रेज अपना दिया वचन पालने से मुकर गए। उन्होंने हिंदू, मुस्लिम और सिक्खों के हाथ सत्ता सौंपने का निर्णय लिया।

अपने राजनीतिक आंदोलन का वह बड़ा ही विचित्र दौर था। सब तरफ अंधेरा छाया हुआ था। आशा की एक किरन भी कहीं नजर नहीं आ रही थी। मेरे सिर पर अपने लोगों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। ऐसे हालात में मैं उन्हें किसी भी रास्ते ले जाने के लिए तैयार नहीं था। हालात का सही आकलन होने तक इंतजार करने का निर्णय मैंने लिया।

मुझसे यह सवाल पूछा जाता है कि 25 सालों तक आपने काँग्रेस से टक्कर ली और अब ऐन वक्त पर आपको सांप क्यों सूंघ गया? चुप रहने की नीति आपने अब क्यों अपनाई? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि लड़ाई की नीति हमेशा काम नहीं आती। कई बार दूसरी नीति अपनाना जरूरी हो जाता है। अंग्रेजों ने हमें धोखा दिया और कई दगाबाज हमारे बीच भी थे। इतनी बड़ी संस्था के साथ लड़ना उस वक्त ठीक नहीं होता। इसके बाद सुलह का रास्ता ही बचता है। इस तरह से हमें कई अधिकार मिले हुए हैं। हमें जितना चाहिए था उतना हमारी झोली में भले न आया हो, हमने काफी बातें हासिल कर ली हैं।

विधानसभा में और नौकरियों में हमें आरक्षण मिला है। इससे हमारा उस क्षेत्र में प्रतिनिधित्व का अवसर हमें मिला है। हमारी लगभग सभी मांगें मान ली गई हैं। अलग चुनाव क्षेत्र की मांग मंजूर नहीं हुई। अन्य अल्पसंख्यकों द्वारा की गई इस मांग को भी अस्वीकार किया गया इसलिए इस बारे में हमें श²मदा होने की जरूरत नहीं है। यह समय काँग्रेस के साथ लड़ाई मोल लेने का नहीं है। सहयोग और समझौते की राह से ही जितना हो सके हमें हासिल कर लेना चाहिए।

मैं केंद्र सरकार में शामिल हुआ हूं लेकिन काँग्रेस का सदस्य नहीं बना। मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। केंद्र सरकार में शामिल होने के लिए मुझे काँग्रेस की तरफ से आमंत्रित किया गया और मैं बिना किसी शर्त के काँग्रेस सरकार में शामिल हुआ।