254 25-4-1948 मैं पत्थर की तरह मजबूत हूं, पिघलने वाला नहीं, आपका हाल अलग है, आप ढेले की तरह बिखर जाओगे - लखनऊ - Page 102

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डर होता है।

हाल ही में काँग्रेस से समाजवादी अलग हुए और अब काँग्रेस और समाजवादी इस प्रकार दो पार्टियां बनी हैं। हमारे सामने नहीं है कि क्या हमें काँग्रेस में शामिल होना चाहिए? असली सवाल है कि हमें काँग्रेस में शामिल होना चाहिए या समाजवादियों का साथ देना चाहिए? समाजवादियों की पार्टी अधिक बलवान होने की संभावना है। इसलिए मैंने सलाह दी कि इन दोनों पार्टियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए उनसे लाभ लेने वाली सत्ता के रूप में हमें तीसरी पार्टी बनानी चाहिए। केवल अनुयायी बन कर किसी पार्टी में शामिल होने का कोई मतलब नहीं। ऐसे मेल के सहारे बहुत हुआ तो हम अधिकार पाएंगे लेकिन इससे सत्ता अथवा अधिकार हासिल कर ही लेंगे इसका कोई भरोसा नहीं।

इस संदर्भ में मैंने आगे कहा कि, जनसंख्या के अनुपात के अनुसार संयुक्त प्रांत में नौकरियों में आपको 22 प्रतिशत आरक्षण की जरूरत होते हुए भी केवल 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया इसलिए अभी हाल ही में आपने एक प्रस्ताव के जरिए मंत्रीमंडल के प्रति निषेध प्रकट किया है। आप जो आरक्षित जगहें चाहते हैं वे आपको क्यों नहीं दी जातीं? क्योंकि संयुक्त प्रांत के विधिमंडल में जिस बहुमत की जरूरत होती है उसके लिए वे आप पर निर्भर नहीं हैं। इसलिए लेन-देन की बातचीत के लिए मजबूत संगठन

खड़ा करने के बाद ही आप सरकार से 22 प्रतिशत की मांग कर सकते हैं। तब ‘हमें इनके भरोसे ही चलना है’ यही सोच कर आपकी मांग स्वीकारी जाएगी।

उसके बाद मैं पिछड़ी जनजातियों और दलित वर्ग की एकता के बारे में बोला। इन दोनों को मिलाने से देश की जनता बहुसंख्यक बन जाती है। अगर वे मिल जाएं तो क्या वे इस देश पर राज नहीं कर सकेंगे? राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए उन्हें बस एकजुट होना है। वयस्क मतदान शुरू होने जा रहा है इसलिए यह कठिन भी नहीं है। जनता धैर्यशाली इसलिए नहीं बन पाती क्योंकि उसे लगता है कि काँग्रेस यहां हमेशा के लिए रहने वाली है। यह गलत सोच है। लोकप्रिय जनतंत्र में कोई भी सरकार हमेशा के लिए नहीं रह सकती। जब कांग्रेस के कालाबाजारी का हमारे देश के लोगों को पता चलेगा तो अपने आप ही जनता द्वारा कांग्रेस को नकारा जाएगा। अन्य पिछड़े वर्ग और दलित-पीडि़तों को राज करने का कभी अवसर मिलेगा ही, ऐसा मेरा विश्वास है। ध्यान में रखें कि, पं. नेहरू और सरदार पटेल जैसे उच्च नेताओं द्वारा स्थापित की गई सरकार भी हमेशा के लिए नहीं टिकी रह सकती।

आपको मेरे इस बयान से ध्यान में आ गया होगा कि मैंने काँग्रेस पर या मंत्रिमंडल के अपने सहयोगियों पर हमला किया यह कहना कितना गलत है।