84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी
संविधान की नहीं मनुष्य की धूर्तता की होगी
29 अगस्त, 1947 के दिन संविधान सभा में आयु. सत्यनारायण सिन्हा द्वारा निम्नलिखित सात सदस्यों की मसौदा समिति गठित करने के बारे में प्रस्ताव रखा था जिसे सभा द्वारा मंजूर किया गया। प्रस्ताव में सम्मिलित सात सदस्यों के नाम निम्नानुसार थे-
अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
एन. गोपालस्वामी अयंगार
डॉ. बी. आर. आंबेडकर
के. एम. मुन्शी
सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला
बी. एल. मित्तल
डी. पी. खेतान ख्1,
30 अगस्त, 1947 के दिन डॉ. अम्बेडकर को मसौदा समिति के अध्यक्ष के तौर पर सर्वसम्मति से चुना गया। इस समिति की पहली बैठक 27 अक्तूबर, 1947 को हुई। इस दरमियान के दो महीने के समय में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्रप्रसाद का एक पत्र मसौदा समिति के नाम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मिला। इस पत्र को बैठक में प्रस्तुत किया गया। उस पत्र में कहा गया था कि - संविधान समिति की बैठक दिसंबर माह के मध्य में होने के कारण राव के ड्राफट का सभी सदस्यों में वितरण किया जाए। इस पर डॉ. अम्बेडकर के साथ सभी अन्य सदस्यों ने अपनी राय दर्ज की कि इसकी कोई जरूरत नहीं क्योंकि इस ड्राफट और उपसमितियों की रिपोर्ट को ध्यान में रख कर संविधान का नया मसौदा बनाना है।
इस दरमियान अर्थात् 30 अगस्त, 1947 के बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कार्यालय द्वारा बनाए गए मसौदे की सभी धाराओं का निरीक्षण कर अपनी शब्द रचना वाली धाराएं बनाई थीं। 27 अक्तूबर 1947 से संविधान सलाहकार के कार्यालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे तथा उसकी धाराओं पर विचार और बहस हुई। उसमें कौन-सी धाराएं बदलनी होंगी, कौन-सी धारा को बढ़ाना होगा, किसकी शब्द रचना को बदलना
- डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेस, ड 13, पृष्ठ क्र. 29