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होगा आदि मसलों पर फुर्ती से निर्णय लिए गए। ख्1,
संविधान सभा के सामने मसौदा प्रस्तुत करते हुए मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने घटना समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्रप्रसाद को मसौदे से संबंधित एक पत्र भी दिया था। उसमें उन्होंने मसौदा समिति की भूमिका स्पष्ट की थी। पत्र इस तरह था-
नई दिल्ली
21 फरवरी, 1948
प्रति,
सम्माननीय अध्यक्ष,
भारतीय संविधान सभा,
नई दिल्ली
प्रिय महोदय,
भूमिका - संविधान सभा द्वारा 29 अगस्त, 1947 के दिन पारित किए गए प्रस्ताव के अनुसार नियुक्त किए गए मसौदा समिति द्वारा तैयार किया गया भारत का नया संविधान मसौदा समिति की ओर से मैं प्रस्तुत कर रहा हूं।
समिति के सदस्यों की ओर से भले मुझे हस्ताक्षर करने का अधिकार दिया गया हो, समिति की हर सभा में सभी सदस्य उपस्थित नहीं रहा करते थे। लेकिन जिन सभाओं में निर्णय लिए गए उस हर सभा में आवश्यक सदस्य संख्या में उपस्थिति हुआ करती थी और निर्णय एकमत से अथवा उपस्थित सदस्यों के बहुमत से लिए जाते।
मसौदा तैयार करते हुए संविधान सभा द्वारा लिए गए निर्णयों की अथवा संविधान सभा द्वारा नियुक्त की गई समितियों के निर्णयों पर मसौदा समिति द्वारा अमल किए जाने की उम्मीद थी। मसौदा समिति ने जहां तक संभव हो इसका पालन करने की कोशिश की है। लेकिन कुछ मामलों में मसौदा समिति को लगा कि बदलाव करना जरूरी है। इस प्रकार किए गए सभी बदलाव अधोरेखांकित कर अथवा बदले हुए हिस्से के पास अलग से जिक्र कर बताए गए हैं। हर परिवर्तन को स्पष्ट करने के लिए अलग से टिप्पणी देने के एहतियात भी मसौदा समिति द्वारा लिए गए हैं। लेकिन विषय का महत्व ध्यान में रखते हुए इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों की ओर आपका और संविधान सभा का ध्यान दिलाना योग्य होगा ऐसा मुझे लगता है।
उद्देश्य-पत्रिका - जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत लक्ष्य प्रस्ताव
फुले-अम्बेडकर संशोधनातील प्रदूषणेः लेखक वसंत मून, पृष्ठ संख्या 21