86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उद्घोषित करता है कि भारत एक सार्वभौम, स्वतंत्र गणराज्य होगा। मसौदा समिति द्वारा सार्वभौम प्रजासत्ताक गणराज्य शब्दसमूह स्वीकृत किया गया है क्योंकि, सार्वभौम शब्द में ही स्वतंत्रता अंतर्निहित है। इसलिए स्वतंत्र शब्द जोड़ने से अधिक कुछ हासिल होगा ऐसा नहीं लगता। भारतीय प्रजासत्ताक गणराज्य और ब्रिटिश राष्ट्रसंघ के बीच के संबंधों का सवाल आगे चल कर हल करना है।
लक्ष्य से संबंधित प्रस्ताव में शामिल न होते हुए भी समिति द्वारा बंधुत्व के परिच्छेद को लक्ष्य वाले परिच्छेद में समाविष्ट किया है। बंधुत्व और शुभकामनाओं की आज भारत को जितनी जरूरत है उतनी पहले कभी नहीं थी और नए संविधान में इस विशेष लक्ष्य का उद्देश्य पत्रिका में खास जिक्र करते हुए उस पर विशेष जोर देने की जरूरत समिति को लगी।
अन्य मामलों में उद्देश्य-पत्रिका का लक्ष्य तथा उसकी भाषा भी शामिल करने की समिति द्वारा कोशिश की गई है।
धारा 1 -
- भारत का वर्णन- मसौदे के पहले अनुच्छेद में भारत का वर्णन संघराज्य (Union of States) इस प्रकार किया गया है। संघराज्य के घटकों को आज राज्यपाल के प्रांत या मुख्य आयुक्त के प्रांत या भारत के संस्थानों के तौर पर पहचाना जाता है, लेकिन समान जिक्र हो इसलिए नए संविधान में उनका जिक्र राज्य (state) के तौर पर करना समिति को अधिक युक्तियुक्त लगता है। बेशक नए संविधान में कुछ घटकों में फर्क रहेगा और इस फर्क को स्पष्ट करने के लिए समिति ने राज्यों को तीन हिस्सों में बांटा है - पहली सूची के भाग 1, भाग 2 और भाग 3 में शामिल हिस्से नई व्यवस्था के अनुसार राज्यपाल के प्रांत, मुख्य आयुक्त के प्रांत और भारतीय संस्थान होंगे।
समिति ने फेडरेशन की जगह संघराज्य (Union) शब्द का प्रयोग किया है। नाम से वैसे कोई फर्क नहीं पड़ता फिर भी समिति ने ब्रिटिश नॉर्थ अमेरिका एक्ट, 1867 के उद्देश्य-पत्रिका की भाषा को प्रधानता दी है और संविधान की तरह रचना भले फेडरेशन की हो फिर भी सोचा यही है कि भारत का वर्णन संघराज्य (Union) के तौर पर करना ही लाभदायक है।
अनुच्छेद 5 और 6ः
- नागरिकता - समिति ने संघराज्य के नागरिकत्व के बारे में बहुत ही ध्यानपूर्वक और विस्तृत विचार-विमर्श किया है। समिति ने सोचा कि संघराज्य निर्माण के समय संघराज्य नागरिकता की प्राप्ति के लिए व्यक्ति के भौगोलिक दृष्टिकोण से जन्म अथवा वंश अथवा स्थायी निवास का आधार आवश्यक होगा। इस प्रमाण के बगैर वह कानूनन