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अस्वीकार किया जाएगा। भारतीय भूमि के साथ इस प्रकार का कोई भी संबंध न होने वाले व्यक्ति अगर भारत के साथ एकनिष्ठता की शपथ लें तो उन्हें नागरिकता प्रदान करने को लेकर समिति आश्वस्त नहीं है। क्योंकि अगर दूसरे देश भी इसी प्रकार की व्यवस्था को लागू करेंगे तो ऐसे कई लोग होंगे जो हमारे संघराज्य में पैदा हुए, यहीं उनका स्थायी निवास होगा और उनकी निष्ठा किसी विदेश के साथ बंधी होगी। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में भारत में स्थानांतरित हुए लोगों की जरूरतों के बारे में समिति ने सोचा है और उनके निवास और उनकी नागरिकता की प्राप्ति के लिए खास आसान पद्धति का अवलंब किया है। वे या उनके माता-पिता में से कोई एक या उनके दादा-दादी में से कोई एक भारत अथवा पाकिस्तान में पैदा हुए हैं यह मान कर उन्हें आगे बताई बातों पर अमल करना होगा-
अ) भारत के जिला मॅजिस्ट्रेट के सामने भारत में रहने की इच्छा प्रकट करना_ और
ब) इच्छा प्रकट करने से पहले कम से कम एक महीने तक भारत में रहना।
अनुच्छेद 7 से 27
- मौलिक अधिकार - मौलिक अधिकार और उनकी सीमाओं के बारे में जहां तक संभव हो स्पष्टता के साथ विचार रखने की कोशिश की है। क्योंकि न्यायालयों को उनके आधार पर न्याय देना होगा।
अनुच्छेद 59ः
- संघराज के राष्ट्रपति के अधिकार - भारतीय राज्य और अन्य घटकों के राज्यकर्ताओं के प्रति कोई दुर्भावना मन में न पालते हुए समिति ने सोचा है कि मृत्युदंड की सुनाई गई सजा को मुल्तवी करने, माफ करने या कम करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास रहना उचित रहेगा।
अनुच्छेद 278ः कुछ विशेष स्थितियों में संविधान में कुछ विशेष प्रबंध स्थगित कर राज्यपाल को घोषणा-पत्र जारी करने का अधिकार नए संविधान के तहत दिया गया है। यह काम वह केवल दो हफतों की अवधि तक कर सकते हैं और उनके लिए आवश्यक होगा कि वे इसकी रपट राष्ट्रपति को भेजें। रिपोर्ट पाने के बाद राष्ट्रपति उस घोषणा-पत्र को रद्द कर सकते हैं अथवा अपना नया घोषणा-पत्र जारी कर सकते हैं। परिणामतः राज्य कार्यकारिणी की जगह केंद्रीय कार्यकारिणी की सत्ता जारी होगी। घोषणा-पत्र में दर्ज किए गए समय के लिए राज्य के अधिकार वाले प्रदेश पर केंद्र की सत्ता शुरू होगी। 1935 के कानून अंतर्गत . ‘अनुच्छेद 93 की प्रशासन पद्धति’ (Section 93 regime) की जगह यह व्यवस्था लागू की गई है।