255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 108

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का सुझाव है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अवकाशप्राप्त न्यायाधीशों को बुलाया जाए।

अनुच्छेद 131ः

  1. राज्यपालों की नियुक्ति की प्रक्रिया - समिति के कुछ सदस्यों की राय में निर्वाचित राज्यपाल और विधानसभा के लिए जिम्मेदार मुख्यमंत्री का सहअस्तित्व संघर्ष पैदा कर सकता है। इसलिए समिति द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति की विकल्प प्रक्रिया का सुझाव दिया है - विधिमंडल चार व्यक्तियों के नाम सुझाए (जरूरी नहीं कि वे उसी राज्य के निवासी हों) और संघराज्य के राष्ट्रपति उन चार में से एक की राज्यपाल के पद पर नियुक्ति करें।

अनुच्छेद 138ः

  1. उपराज्यपाल - समिति को उपराज्यपाल के प्रावधान की जरूरत है ऐसा नहीं लगता। क्योंकि, राज्यपाल के कार्यरत रहने तक उपराज्यपाल के लिए करने लायक कोई भी काम नहीं बचेगा। केंद्र की स्थिति अलग है। क्योंकि, उपराष्ट्रपति राज्यसभा का अध्यक्ष है। लेकिन कई राज्यों में वरिष्ठ सभागृह नहीं होगा और उपराष्ट्रपति की तरह ही उपराज्यपाल को काम सौंपना संभव नहीं होगा। मसौदे में व्यवस्था की गई है कि अचानक स्थितियों में उम्मीद न हों ऐसे बदलाव आएं तो विधानमंडल (अथवा राष्ट्रपति को) राज्यपाल द्वारा किए जाने वाले कामों के निर्णय लेने के अधिकार दिए गए हैं।

अनुच्छेद 212 से 214ः

  1. केंद्रशासित प्रदेश - संविधान सभा द्वारा पारित किए गए प्रस्तावों के अनुसार हमने अध्यक्ष के नाते दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कूर्ग, पंथ-पिपलोडा और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह इन केंद्रशासित प्रदेशों के लिए संविधानात्मक बदलाव सुझाने के उद्देश्य से सात सदस्यों की एक समिति नियुक्त की थी। समिति द्वारा 21 अक्तूबर, 1948 के दिन अपनी रिपोर्ट पेश की गई। संक्षेप में समिति की सिफारिशें इस प्रकार थीं-

  2. दिल्ली, अजमेर-मारवाड़ और कूर्ग प्रांतों के लिए राष्ट्रपति द्वारा उपराज्यपाल की

नियुक्ति की जाए।

  1. इनमें से हर प्रांत का कामकाज विधानसभा को जवाबदेह मंत्रिमंडल के पास रहेगा।

  2. इनमें से हर प्रांत में चुनाव के जरिए विधानसभा बनेगी। पंथ-पिपलोडा के बारे में

समिति द्वारा सुझाव दिया गया है कि उन्हें अजमेर-मारवाड़ के साथ जोड़ा जाए। अंडमान

तथा निकोबार द्वीप समूहों के बारे में समिति का सुझाव था कि वर्तमान हालात के

अनुसार भारत सरकार आवश्यक बदलाव करके वहां का कामकाज संभाले। अलग

शब्दों में कहें तो ये द्वीपसमूह मुख्य आयुक्त के प्रांतों के रूप में रहेंगे। समिति के