255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 109

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अजमेर-मारवाड़ और कूर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों ने समिति की रिपोर्ट

के साथ अपना मतपत्र जोड़ दिया। उसमें उन्होंने कहा कि, छोटा भूप्रदेश, भौगोलिक

स्थान और इस प्रदेश में संसाधनों की कमी के कारण निर्माण होने वाली विशेष

समस्याओं के कारण निकट भविष्य में इन्हें आसपास के प्रदेश के साथ जोड़ना संभव

नहीं है। सो उनका आग्रह था कि संबंधित लोगों की पड़ताल के बाद इसे संभव

बनाने के लिए संविधान में विशेष प्रबंध करना होगा।

दिल्ली के बारे में समिति को लगता है कि दिल्ली भारत की राजधानी है इसलिए उसे स्थानीय प्रशासन के तहत रखना उचित नहीं होगा। अमेरिका में सरकार का स्थान कहां हो इस बारे में वैधानिक अधिकार का इस्तेमाल काँग्रेस ही करती है और ऑस्ट्रेलिया में भी यही हाल है। इसीलिए मसौदा समिति इस निर्णय तक पहुंची है कि अस्थायी समिति द्वारा जो सुझाव दिए गए हैं उससे व्यापक योजना होना जरूरी है। उसके अनुसार मसौदा समिति ने सुझाया है कि भारत सरकार की तरफ से इन केंद्रशासित प्रदेशों का कामकाज या तो मुख्य आयुक्त या उपराज्यपाल या पड़ोसी राज्य के राज्यपाल या शासक के द्वारा हो। किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए क्या किया जाए इस बारे में राष्ट्रपति एक आदेश निकाल कर निर्णय लेंगे। स्पष्ट है कि अन्य की तरह इस व्यवस्था में भी राष्ट्रपति प्रभारी मंत्री की सलाह का अनुसरण करेंगे। सलाह दिए जाने के बाद वे दिल्ली के लिए उपराज्यपाल की नियुक्ति करेंगे। दी गई सलाह को मानते हुए वह मद्रास के राज्यपाल को कूर्ग का अथवा कूर्ग के लोगों की इच्छा को ध्यान में लेकर मैसूर के शासन का जिम्मा सौंपेंगे। अध्यादेश के माध्यम से वे स्थानीय विधानसभा या सलाहकार मंडल की नियुक्ति कर सकेंगे। उनका स्वरूप अधिकार और कार्य अध्यादेश के निर्देशानुसार तय होंगे। यह योजना मसौदा समिति को संबंधित प्रदेशों की जरूरतों के अनुसार मेल खाने वाली और लचीली लगी।

समिति द्वारा यह व्यवस्था भी की गई है कि भारतीय संस्थानों (Indian States) की योजना उड़ीसा (ओडिशा) की तर्ज पर की जाएगी जिन्होंने अपनी समूची सत्ता, अपना कार्यक्षेत्र और अपने अधिकार केंद्र सरकार को सौंप रखे हैं। उन्हें केंद्र शासित प्रदेश मानते हुए मुख्य आयुक्त, उपराज्यपाल या पड़ोसी राज्य के राज्यपाल अथवा शासक के द्वारा हर क्षेत्र की जरूरत के अनुसार प्रशासन चलाया जाएगा।

अनुच्छेद 216 से 232ः

  1. वैधानिक अधिकारों का विभाजन - केंद्रीय अधिकार समिति की सिफारिशों के अनुसार और संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए अनुसार वैधानिक सूची के ज्यादातर हिस्सों में बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन मसौदा समिति द्वारा जिनमें बदलाव किया गया है उन तीन बातों की ओर मैं आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा।

अ) समिति ने सुझाया है कि जब सामान्य तौर पर राज्यसूची में शामिल विषय को

राष्ट्रीय महत्व प्राप्त होता है तब संसद कानून बना सकती है। राज्य के अधिकारों