255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 110

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पर अनावश्यक अतिक्रमण न हो इसलिए मसौदे में इस प्रकार प्रबंध किया गया

है कि राज्यसभा में जहां राज्य के अंश के रूप में प्रतिनिधित्व होता है वहां 2/3

बहुमत से इस संदर्भ में प्रस्ताव पारित हो तो केंद्र इस प्रकार कर सकता है।

ब) समिति ने सोचा है कि खेती की जमीन के अलावा अन्य संपत्ति पर विरासत के

अधिकार का ही नहीं, उत्तराधिकार से संबंधित सभी विषयों को साझा सूची में

शामिल करना योग्य रहेगा। इसी प्रकार जो मसले विभिन्न तरह के निजी कानूनों

द्वारा फिलहाल तय होते हैं उन सभी मसलों को समिति ने समवर्ती सूचित किया

है। इसलिए इस मामले में भारत में एक समान कानून बनाना आसान होगा।

क) केंद्र के लिए भूमि संपादन केंद्र सूची में और राज्य के उपयोग के लिए भूमि

संपादन का कानून राज्य सूची में शामिल किया गया है। समिति ने सुझाया है

कि जिन तत्वों के आधार से संपादित की गई भूमि की भरपाई तय की जाएगी

उन सभी मामलों को समवर्ती सूची में शामिल किया जाएगा जिससे इसमें

समानता आ सकेगी।

इसके अलावा आजकल की विचित्र स्थितियों को ध्यान में रखते हुए जहां आवश्यक चीजों की आपूर्ति पर केंद्र के नियंत्रण की जरुरत है वहां के बारे में समिति का सुझाव है कि संविधान लागू होने के बाद पांच सालों की तय अवधि तक आवश्यक चीजों का उत्पादन आपूर्ति और आवश्यक वितरण प्रणाली विस्थापितों की मदद और पुनर्वास जरूरी चीजों का व्यापार और वाणिज्य समवर्ती सूची के विषयों के अनुसार ही रहेंगे। इस नीति को अपनाते हुए समिति ने भारतीय कानून 1946 के केंद्र सरकार और विधानसभा कानूनी प्रावधानों का अनुसरण किया है।

अनुच्छेद 247 से 269

  1. वित्तीय प्रबंध -व्यापक नजरिए से अगर सोचा जाए तो केंद्र और राज्यों की चुंगी के समिति वितरण संबंधी मामलों के अलावा विशेषज्ञ वित्त समिति की सभी सिफारिशें मसौदा द्वारा मसौदे में शामिल की गई हैं। इस क्षेत्र में फिलहाल के अस्थिर माहौल को ध्यान में रखते हुए मसौदा समिति ने सोचा है कि अगले पांच सालों तक चुंगी वितरण क्षेत्र में ‘जैसे थे’ स्थिति बरकरार रखना ही योग्य होगा। आखिरी वर्ष में वित्त आयोग हालात का जायजा ले सकेगा।

अनुच्छेद 281 - 283

  1. सेवा - सेवाओं से संबंधित पूरे विवरण के साथ प्रबंधों को संविधान में जोड़ना समिति ने टाला है। संवैधानिक प्रबंध करने से सुयोग्य विधानसभाओं द्वारा कानून बना कर उसका पालन करने का समिति ने सोचा है। समिति की राय यह है कि अन्य देशों की तरह ही इस देश के भावी विधानसभा भी सेवा क्षेत्र को निष्पक्षता से संभालेंगे।