94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
देने वाला, कार्यक्षम, स्वीकार योग्य, तुलनात्मक नजरिए से श्रेष्ठ संस्मरणीय दस्तावेज डॉ. अम्बेडकर और उनकी मसौदा समिति ने प्रस्तुत किया है। ख्1,
दिनांक 4 नवम्बर, 1948 के दिन संविधान का मसौदा संविधान सभा के समक्ष पेश करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा -
‘‘अध्यक्ष महोदय,
मसौदा समिति द्वारा पारित किया गया संविधान का मसौदा मैं विचारार्थ इस सदन में प्रस्तुत कर रहा हूं।
29 अगस्त, 1949 के दिन संविधान सभा में पारित प्रस्तावानुसार इस मसौदा समिति की नियुक्ति की गई थी। संविधान सभा द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार समिति, केंद्रीय संविधान समिति, अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्र आदि की प्रांतीय संविधान समिति और मौलिक अधिकार सलाहकार समिति की रिपोर्ट के अनुसार संविधान सभा द्वारा लिए गए निर्णय पर आधारित संविधान निर्माण की जिम्मेदारी मसौदा समिति को सौपी गई थी। संविधान सभा द्वारा यह निर्देश भी दिया गया था कि कुछ विशिष्ट मसलों पर भारत कानून, 1935 के प्रावधानों को अपनाया जाए। संविधान सभा द्वारा दिए गए निर्णयों में मसौदा समिति किन मामलों पर विचार करना नहीं चाहती और किन मामलों में बदलाव कर विकल्प सुझाए हैं इसका जिक्र मैंने 21 फरवरी, 1948 को अपने खत में किया है। इस अपवाद को छोड़ दें तो संविधान सभा द्वारा दिए गए अन्य सभी निर्देर्शों का मसौदा समिति द्वारा ईमानदारी से पालन किया गया है, ऐसा मेरा विश्वास है।
मसौदा समिति द्वारा निर्माण किया गया संविधान का मसौदा एक असाधारण दस्तावेज है। इसमें 315 अनुच्छेद और 8 परिशिष्टो का समावेश है। संविधान का यह मसौदा अन्य किसी भी देश के संविधान की तुलना में अधिक विस्तृत है, यह मानना ही पड़ेगा। जिन्होंने इसे पढ़ा नहीं है उन्हें इसकी महत्वपूर्ण और विशेष खासियतों का पता नहीं चल पाएगा।
संविधान का यह मसौदा आठ महीनों तक लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध था। मित्र समीक्षक और विरोधियों के लिए इसके प्रावधानों प्रतिक्रिया प्रकट करने के लिए इतना समय काफी था। इनमें से कुछ प्रतिक्रियाएं अनुच्छेदों का अर्थ न समझने के कारण व्यक्त की गई हैं ऐसा मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं। जो भी हो, आपत्तियां उठाई जा रही हैं तो उनका जवाब देना ही पड़ेगा।
इन दो वजहों से इस मसौदे को विचारार्थ प्रस्तुत करते हुए मैं आपका ध्यान संविधान के प्रमुख मुद्दों की ओर दिलाना चाहता हूं। साथ ही जो आपत्तियां उठाई गई हैं उनका जवाब भी देना चाहता हूं। उससे पूर्व संविधान सभा द्वारा नियुक्त की गई तीन समितियों की रिपोर्ट
- डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर राइटिग एंड स्पीचेस के अंग्रेजी परिच्छेद का मराठी में पृष्ठ 72 से 77, 13
खंड, भाषांतर अतिथि संपादक मंडल द्वारा किया गया।ह्