255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 114

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मैं सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं। केंद्र और (1) मुख्य आयुक्त के प्रांतो के बारे में रिपोर्ट, (2) केंद्र और राज्यो के आर्थिक संबंधों के बारे में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, (3) आदिवासी क्षेत्र के बारे में सलाहकार और समिति की रिपोर्ट जो मसौदा समिति को विचारार्थ काफी देर से मिला, इसके बावजूद उसकी प्रतियों का सदन के सभी सदस्यो में वितरण किया गया है। इस रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों का मसौदा समिति द्वारा विचार किया गया है इसके बावजूद सदन के पटल पर इसे रखना औपचारिकता के नजरिए से समीचीन होगा।

अब हम मुख्य विषय पर आते हैं। संविधान से संबंधित कानून के छात्र संविधान हाथ में आते ही निश्चित रूप से दो सवाल पूछेंगे। पहला सवाल संविधान प्रशासन के किस तरीके पर आधारित है और दूसरा सवाल संविधान का स्वरूप क्या है। ये दो सवाल इतने महत्वपूर्ण हैं कि हर संविधान के मसौदे में भारतीय संघ राज्य के सर्वोच्च पद पर कार्यकारी अधिकारी का प्रावधान है जिसे संघ का राष्ट्रपति कहा जाएगा। कार्यकारी अध्याय 7 का यह पद हमें अमेरिका के अध्यक्ष पद की याद दिलाता है। लेकिन केवल नाम की समानता के अलावा अमेरिका के और मसौदा समिति द्वारा अपनाई गई प्रशासन पद्धति में किसी प्रकार की समानता नहीं है। अमेरिका की शासन पद्धति को अध्यक्षीय शासन पद्धति कहते हैं। संविधान के मसौदे में संसदीय प्रणाली अपनाई गई है इन दोनों में मौलिक अंतर है।

अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली में अध्यक्ष कार्यकारी मंडल का प्रमुख होता है। प्रशासन पूरी तरह उसके आधीन होता है। संविधान मसौदे के अंतर्गत राष्ट्रपति का स्थान इंग्लैंड के संविधान के राजा के समान है। वह राज्य का प्रमुख है लेकिन कार्यकारी मंडल का नहीं। वह राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन राष्ट्र पर प्रशासन नहीं करता। वह राष्ट्र का प्रतीक है। प्रशासन में उनका स्थान प्रतीकात्मक ठप्पे का है, राष्ट्र के निर्णय उनके हस्ताक्षर और ठप्पे के साथ घोषित किए जाते हैं। अमेरिका के संविधान के अनुसार अध्यक्ष के तहत विभिन्न विभागों के सचिव काम करते हैं। इसी प्रकार भारतीय संघराज्य के राष्ट्रपति के अधिकार में विभिन्न शासकीय विभागों के मंत्री काम करेंगे। यहां एक बार फिर दोनों के बीच मौलिक अंतर है। किसी भी सचिव द्वारा दी गई सलाह मानने का बंधन अमेरिका के राष्ट्रध्यक्ष पर नहीं है। भारतीय संघराज्य के राष्ट्रपति के लिए लेकिन उनके मंत्रियों की दी हुई सलाह को मानना बंधनकारी है। मंत्रियों की सलाह के खिलाफ जाकर अथवा उनकी सलाह के बगैर वह कुछ नहीं कर सकते। अमेरिका के अध्यक्ष किसी भी सचिव को किसी भी वक्त पदमुक्त कर सकते हैं। भारतीय संघराज्य के राष्ट्रपति को लेकिन संसद में मंत्रियों को जब तक बहुमत प्राप्त है तब तक कुछ करने का अधिकार नहीं।

अमेरिका की अध्यक्षीय शासनप्रणाली कार्यकारी मंडल तथा कानून मंडल के विभाजन पर आधारित है, जिसके कारण अध्यक्ष और उनके सचिव काँग्रेस के सदस्य नहीं होते। मसौदा संविधान को यह प्रणाली मंजूर नहीं। भारतीय संघराज्य के मंत्री संसद के सदस्य होते हैं। केवल संसद के सदस्य ही मंत्री बन सकते हैं। संसद के अन्य सदस्यों की तरह