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मसौदा संविधान ने ऑस्ट्रेलियन संविधान का अनुसरण किया है या फिर बड़े पैमाने पर अनुसरण किया है, केवल इतना भर कहकर नहीं चलेगा। एक बात ध्यान में रखनी होगी कि, संघराज्य की कठोरता और उसके कानूनी स्वरूप को मात देने के लिए नए उपायों की योजना की है जो बेहद विशिष्टतापूर्ण हैं तथा वह और कहीं दिखाई नहीं देती।
इसमें से पहले, अर्थात् सामान्य स्थितियों में केवल प्रांतों से संबंधित विषयों के संदर्भ में भी संसद को कानून बदलने का अधिकार दिया गया है। इस मामले में अनुच्छेद 226, 227 और 229 की ओर मैं ध्यान दिलाना चाहूंगा। अनुच्छेद 226 के अनुसार राज्य की सूची का एकाध विषय भी अगर राज्य से संबंधित हो तो भी देश के लिए महत्वपूर्ण हो तो वरिष्ठ सभागृह में दो बटा तीन 2/3 के बहुमत से पारित किए जाने के बाद केंद्र सरकार उस संदर्भ में कानून बना सकेगी। राष्ट्रीय आपातकाल के समय अनुच्छेद 227 के तहत इसी प्रकार का अधिकार संसद को दिया गया है। प्रांत अगर इजाजत दें तो संसद के इस प्रकार के अधिकारों का उपयोग करने का प्रावधान अनुच्छेद 229 में दिया गया है। इनमें से आखरी वाला प्रबंध ऑस्ट्रेलिया के संविधान में अगर है तब भी अन्य दो मसौदा संविधान की विशेषताएं हैं।
कठोर और कानूनी होना कम करने के लिए स्वीकारा गया दूसरा उपाय है। संविधान में सुधार के लिए संविधान के अनुच्छेदों का दो विभागों में विभाजन होता है। पहले हिस्से में, (क) केंद्र और राज्यों में कानून बनाने वाले अधिकारों का विभाजन (ख) संसद में राज्यों को दिया गया प्रतिनिधित्व और (ग) न्यायालयों के अधिकार से संबंधित अनुच्छेद। अन्य सभी अनुच्छेदों का समावेश दूसरे हिस्से में किया गया है। संविधान का बड़ा हिस्सा संविधान के दूसरे हिस्से से व्याप्त है और संसद दो तरह के बहुमत से उनमें सुधार कर सकती है, हर सदन में उपस्थित और मतदान में हिस्सा लेने वाले कुल सदस्यों की संख्या के 2/3 बहुमत द्वारा तथा हर सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा। इस अनुच्छेद में सुधार के लिए राज्यों की अनुसंमति की जरूरत नहीं। केवल पहले हिस्से के अनुच्छेदों में सुधार के लिए मात्र अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर राज्यों की अनुसंमति की शर्तों की योजना की गई है।
इसलिए कोई भी बेहिचक यह कह सकता है कि कानूनी और कठोर होने के दोषों का भारतीय संघराज्य पर कोई असर नहीं होगा। लचीलापन इस संघराज्य की खासियत है।
अन्य संघराज्यों की तुलना में प्रस्तावित भारतीय संघराज्य की एक और खासियत है। अलग विधिमंडल, अलग कार्यकारी मंडल और न्यायिक अधिकार के बारे में विभाजित अधिकारों पर निर्भर होने के कारण हर सत्ता केंद्र में कानून, प्रशासन और न्यायिक सुरक्षा में अनिवार्यतः भिन्नता पैदा होती है। खास सीमा तक इस भिन्नता का अनुचित असर नहीं होता। स्थानीय जरूरतें और हालात ध्यान में लें तो प्रशासन को कानून बनाने के लिए इस बात का स्वागत भी किया जा सकता है। लेकिन यही भिन्नता एक खास सीमा के