102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बाद बौखलाहट भरी स्थितियां निर्माण करने का कारण भी बन सकती हैं। उसके कारण कई संघराज्यों में इस प्रकार की बौखलाहट वाली स्थितियां उत्पन्न भी हुई हैं। संघराज्य में अगर 20 राज्य होंगे तो विवाह, तलाक, विरासत के अधिकार, पारिवारिक संबंध, करार, क्षतिपूर्ति, अपराध, नाप-तौल, चेक और अधिपोषण, वाणिज्य, न्यायप्राप्ति की क्रिया, प्रशासन का दर्जा और पद्धति के बारे में अलग-अलग कानूनों की कल्पना करनी पड़ेगी। ऐसे हालात न सिर्फ राज्यों को कमजोर करते हैं बल्कि एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले नागरिक के लिए भी असहनीय बन जाते हैं। क्योंकि, इससे एक राज्य में कानून द्वारा सहमति प्राप्त बात दूसरे राज्य में गैर-कानूनी साबित हो सकती है। भारतीय संघराज्य का स्वरूप कायम करने के उपाय और मार्ग मसौदा संविधान ने सुझाए हैं। साथ ही देश की एकता पर आंच न आने देने के लिए आवश्यक मूलभूत बातों में भी एकसूत्रता पैदा की है। मसौदा संविधान द्वारा इसके लिए तीन सूत्र अपनाए हैं। [Civil & Criminal Procedure Code]
1) एक ही न्याय पद्धति
2) मूलभूत नागरिक और फौजदारी संहिता में एक समानता_ और
3) महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के लिए समान अखिल भारतीय नागरी सेवाएं।
मेरे कहने के मुताबिक दोहरी न्याय व्यवस्था, दोहरी विधि संहिता और दोहरी नागरी सेवा में संघराज्य की मूल दोहरी राजनीतिक व्यवस्था की तार्किक परिणति है। अमेरिका में संघराज्य न्याय व्यवस्था और राज्य न्याय व्यवस्था एक-दूसरे से भिन्न और स्वतंत्र हैं। भारतीय संघराज्य में राज्य की व्यवस्था दोहरी होने के बावजूद न्याय पद्धति बिल्कुल दोहरी नहीं है। उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय एक ही न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। घटनात्मक कानून, कानून या फौजदारी कानून से निर्माण होने वाले सभी मामलों को हल करने के लिए अधिकार क्षेत्र के तौर पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की एक-सी न्याय व्यवस्था निर्माण की गई हैंइस कार्य पद्धति में सभी तरह की उपाय योजनाओं की भिन्नता को टालने के लिए इस व्यवस्था को बनाया गया है। लगभग इसी तरह की व्यवस्था केवल कनाडा में है। ऑस्ट्रेलिया में भी लगभग इसी तरह की व्यवस्था है।
नागरी और सामुदायिक जीवन के आधार पर बने कानूनों की भिन्नता को भी ध्यानपूर्वक दूर करने की कोशिश की गई है। दीवानी और फौजदारी कानून की महत्वपूर्ण संहिताएं जैसे कि नागरी आचार संहिता, दंड संहिता, फौजदारी आचार संहिता, गवाही का कानून, संपत्ति हस्तांतरण का कानून, तलाक एवं विरासत के अधिकार संबंधी कानून आदि को भी समाहित कर समवर्ती सूचित किया है। जिससे कि संघराज्य प्रणाली को कमजोर न होने देते हुए जरूरी समानता हमेशा के लिए बरकरार रखी जाए।
मेरे अनुसार संघराज्य (Federal) प्रणाली की दोहरी व्यवस्था के साथ-साथ सभी