255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 122

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संघराज्यों में एक केंद्रीय नागरी सेवा और दूसरी राज्य नागरी सेवा होती है। भारतीय संघ राज्य में दोहरी व्यवस्था की दोहरी नागरी सेवा होने के बावजूद उसका एक अपवाद है। स्पष्ट है कि हर देश की प्रशासनिक संरचना में प्रशासन का स्तर कायम रखने के लिए कुछ विशिष्ट महत्वपूर्ण पद होते हैं। प्रशासन के विस्तृत और उलझे हुए तानेबाने में ऐसे पद ढूंढ निकालना आसान नहीं होता। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि नागरी सेवा के इन पदों पर नियुक्त अधिकारियों की क्षमता पर प्रशासन का स्तर निर्भर होता है। संयोग से हमें पूरे देश कें समान प्रशासनिक पद्धति की विरासत मिली है। और हमें अहसास है कि मौके के वे पद कौन-से हैं। इसलिए राज्यों को अपनी नागरी सेवा निर्माण करने से रोके बगैर अखिल भारतीय स्तर पर भारतीय नागरी सेवा के माध्यम से समान योग्यता और समान वेतन की कसौटी पर चुने हुए उम्मीदवारों की ही नियुक्ति पूरे संघराज्य के मौके के पदों पर करने का प्रावधान संविधान में किया गया है।

प्रस्तावित संघराज्य की ये प्रमुव विशेषताएं हैं। अब मसौदा संविधान समीक्षकों के इस बारे में जो मत हैं आइए जान लेते हैं।

कहा जाता है कि मसौदा संविधान में नया कुछ भी नहीं। इसका आधा हिस्सा भारत सरकार कानून, 1935 से लिया गया है और बचा हुआ आधा हिस्सा अन्य देशों के संविधानों से उठाया गया है। मसौदा समिति का अपना योगदान बहुत कम है।

सवाल यह भी पूछा जा सकता है कि दुनिया के इतिहास में आज की तारीख को निर्माण किए जाने वाले संविधान में क्या कुछ नया भी हो सकता है? पहला लिखित संविधान बनने के 100 सालों से अधिक समय बीत चुका है। कई देशों ने उसी का अनुकरण कर अपने संविधानों का निर्माण किया है। संविधान का नियमित सहयोग क्या हो इसका निर्णय बहुत पहले ही किया गया है। साथ ही संविधान के मूलभूत सिद्धांत क्या हों इस बारे में समर्थता के स्तर पर स्वीकृति हो चुकी है। इस पृष्ठभूमि पर प्रमुख प्रावधानों के बारे में सभी संविधानों में समानता दिखाई देना स्वाभाविक है। आज निर्माण होने वाले संविधान में अगर नया कुछ कर दिखाना हो तो इतना ही कि पुराने संविधान के दोषों को दूर करने के लिए बदलाव सुझाना और देश की जरूरत के अनुसार आवश्यक बातें जोड़ना। अंधे होकर अन्य संविधानों की नकल करने का आरोप संविधान के अधूरे अध्ययन पर आधारित है इसका मुझे पूरा-पूरा यकीन है। मसौदा संविधान में नया क्या है इस ओर मैंने आपका ध्यान दिलाया है। जिन्होंने संविधान का अध्ययन किया है और इसके बारे में निष्पक्ष तरीके से सोच-विचार के लिए जो तैयार हैं वे मानेंगे कि मसौदा समिति ने अपना कर्तव्य निभाते हुए बिना देखे और गुलामी की मानसिकता से अनुसरण नहीं किया है।

भारत सरकार कानून, 1935 का बहुत बड़ा हिस्सा मसौदा संविधान में है इस आरोप को लेकर मैं अपनी नाराजगी व्यक्त नहीं करूंगा। अच्छी बातें स्वीकारने में श²मदा होने