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का विश्वास करना बुद्धिमानी साबित नहीं होगा। संविधान में उन्हें समाविष्ट करने के पीछे यही नजरिया है।
संविधान में उन्हें समाविष्ट करने के पीछे यही दृष्टिकोण है।
मसौदा संविधान पर लगाया जाने वाला दूसरा आरोप है कि उसके किसी भी हिस्से में प्राचीन भारतीय राज्यव्यवस्था का प्रतिबिंब दिखाई नहीं देता। कहा जाता है कि भारतीय संविधान का निर्माण प्राचीन हिंदू राज्यव्यवस्था के अनुसार होना चाहिए था। पश्चिमी सिद्धांतों का समावेश किए बगैर नए संविधान की ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के प्रारुप के अनुसार उसका ढांचा बनाया जाना चाहिए था। तो कुछ लोगों ने कट्टर विरोध का रवैया अपनाया है। वे किसी भी तरह की प्रांत या केंद्र सरकारें नहीं चाहते। भारत में अधिक से अधिक ग्राम सरकारें चाहिएं। भारतीय विद्वानों का ग्रामीण समाज के लोगों के प्रति जो प्रेम है वह करुणाजनक भले न हो ‘असीम’! है।
(हंसी).... इसकी प्रमुख वजह है मेटकाफ द्वारा की गई ग्राम पंचायत और जिला पंचायत की प्रशंसा। उनका जिक्र करते हुए मेटकाफ ने कहा कि वे छोटे प्रजातंत्र हैं जिनमें उनकी जरूरत की सभी चीजें उन्हें गांव में ही उपलब्ध होंगी साथ ही बाहरी दुनिया के साथ उनका कोई संपर्क नहीं रहेगा। इस ग्राम समुदाय का अस्तित्व एक अलग राज्य का स्वरूप धारण करता है। मेटकाफ की राय में आज तक हुई सभी क्रांतियां बदलावों के प्रभाव से भारतीय जनता का जतन करने के काम में अन्य किसी बात से इस ग्राम व्यवस्था ने अधिक योगदान दिया है। साथ ही उन्हें मुक्त और स्वतंत्र जीवन का बड़े पैमाने पर उपभोग करने के लिए यह व्यवस्था उपयुक्त है। यह बात सही है कि जहां और कुछ टिका नहीं रहता वहां ग्राम समुदाय टिके हुए हैं। लेकिन जिन्हें ग्राम समुदायों के बारे में गर्व है वे यह कभी नहीं सोचते कि देश के कुल व्यवहारों में तथा देश का भविष्य गढ़ने में ग्राम समुदाय का कितना नगण्य योगदान रहा है और इसके कारण क्या है? देश का भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका का वर्णन खुद मेटकाफ ने किया है। वह कहता है- एक के बाद एक कर राजतंत्र नष्ट होते गए। एक के बाद एक विद्रोह हुए। हिंदु, पठाण मुगल मराठा, सिक्ख और अंग्रेज सब एक के बाद एक राज्यकर्त्ता बने। लेकिन ग्राम समुदाय जैसा था वैसा ही अब तक रहा है। संकट समय आने पर उनमें से कुछ लोग शस्त्र धारण करते हैं और अपने को सुरक्षित करते हैं। शत्रु की सेना देश में संचार करते हुए गुजरती है। ग्राम समुदाय अपने अल्प मवेशियों को चारदीवारी में बंद कर शत्रु की सेना को अपने क्षेत्र से गुजरने देते हैं। उन्हें चुनौती नहीं देते।
देश के इतिहास में ग्राम समुदायों ने ऐसी ही भूमिका निभाई है। यह जानने के बाद किसी को उनके बारे में गर्व क्यों महसूस हो? यह वास्तविकता हो सकती है कि वे सभी तरह के संकटों से बचते आए हैं लेकिन केवल जिंदा रहने का कोई मतलब नहीं। किस स्तर का जीवन जिया यह महत्वपूर्ण है। निश्चय ही उन्होंने केवल निम्न स्तर का