108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं। प्राचीन काल से ही यह मूलभूत सिद्धांत स्थापित हो चुका है।’’
इसलिए यह कहना गलत होगा कि अमेरिका के संविधान ही की तरह मूलभूत अधिकारों की सीमाएं अगर तय करनी हों तो उसका प्रावधान संविधान में ही किया जाए और जहां ऐसा नहीं किया गया है वहां सभी संबंधित मामलों के बारे में सोच-विचार करने के बाद ही निर्णय लेने के अधिकार न्यायपालिका को सौंपे जाएं इसका फैसला किया जा सकता है। मुझे
खेद है कि अमेरिका का संविधान जानने की अगर यह गलती नहीं है तब भी उसका पूरी तरह गलत मतलब निकाला जा रहा है। अमेरिका का संविधान ऐसा कुछ नहीं करता। साथ आने के अधिकार का अपवाद अगर छोड़ दें तो अमेरिका के नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों पर अमेरिकी संविधान अपनी तरफ से किसी तरह की सीमाएं नहीं लादता। अमेरिकी संविधान द्वारा मौलिक अधिकारों पर सीमाएं लादने का अधिकार न्यायपालिका को सौंपा गया है यह कहना भी सही नहीं होगा। सीमाएं लादने का अधिकार विधानसभा का है। समीक्षकों की दृढ़ धारणा से वास्तविक स्थितियां अलग हैं। अमेरिका में संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार असीमित थे इसमें कोई दो राय नहीं। इसके बावजूद तुरंत विधिमंडल के ध्यान में यह बात आ गई कि मौलिक अधिकारों को सीमित करके उन पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय के सामने जब इन सीमाओं की संवैधानिकता का सवाल पैदा हुआ तब दलील पेश की गई कि अमेरिका के विधिमंडल को संविधान द्वारा इस प्रकार सीमाएं लादने का अधिकार नहीं दिया है। तब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुलिस अधिकारों का सिद्धांत पेश किया गया और मूलभूत अधिकारों की असीमितता का समर्थन करने वालों का विरोध करने के लिए दलील पेश की कि हर राज्य को पुलिस अधिकार दिए गए हैं जो उनमें शुरू से शामिल हैं, इसलिए राज्य के पास इस अधिकार के होने का जिक्र संविधान में अलग से करने की जरूरत नहीं है। इससे पूर्व जिक्र किए गए मुकदमें में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय में जो शब्द कहे गए थे वे मैं आज यहां उद्धृत करता हूं -
‘‘इस आजादी का प्रयोग लोककल्याण में बाधा पैदा करने के लिए करने वालों को, सार्वजनिक नैतिकता को भ्रष्ट करना चाहने वालों को, अपराध वृत्ति को बढ़ावा देना चाहने वालों को या बरगलाने वालों को, सार्वजनिक शांति को भंग करने की कोशिश करने वालों को अपने पुलिस अधिकारों का इस्तेमाल कर सजा देने का अधिकार राज्य को है इस बारे में कोई विवाद पैदा न हो....’’
मौलिक अधिकार असीमित हैं - इस प्रकार रचना न करते हुए मसौदा संविधान में पुलिस अधिकार सिद्धांत की सहायता से संसद की मदद के लिए सर्वोच्च न्यायालय पर निर्भर रखे बगैर मौलिक अधिकारों का निर्माण करने का अधिकार संविधान द्वारा प्रत्यक्ष राज्य को दिया गया है। इससे परिणामस्वरूप कोई फर्क नहीं पड़ता। एक में प्रत्यक्ष रूप से जो किया गया है वही दूसरे में परोक्ष रूप से किया गया है। दोनों ही जगह मौलिक अधिकार स्व्छंद या असीमित नहीं हैं।