255 4-11-1948 संविधान के तहत अगर कुछ गलत बातें होती हैं तो जिम्मेदारी संविधान की नहीं मनुष्य की दुष्टता की होगी - नई दिल्ली - Page 130

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संस्थानों को अपनी सेना खड़ी करने की सहूलियत दी गई है। मेरी राय में यह प्रावधान बेहद जोखिम भरा और अधोगामी (पीछे ले जाने वाला?) है और यह भारत के विघटन का तथा केंद्रीय प्रशासन को उखाड़ने का कारण बनेगा। इस मसले पर मसौदा समिति की मानसिकता के बारे में अगर मेरा अंदाजा गलत नहीं हुआ तो मेरे मतानुसार समिति इस मामले को लेकर संतुष्ट नहीं थी। समिति चाहती थी कि प्रांत और भारतीय रियासतों का केंद्र के साथ के संवैधानिक संबंधों का आधार एक ही होना चाहिए। दुर्भाग्य से इस मामले में वे कोई सुधार नहीं ला पाए। संविधान सभा के निर्णय से वह बंधी थी तो दूसरी ओर संविधान सभा लेन-देन संबंधी विचार-विमर्श के लिए नियुक्त दो समितियों के बीच हुए करार से बंधी थी।

लेकिन जर्मनी में जो घटा उससे हम अपने को धीरज बंधा सकते हैं। 1870 में बिस्मार्क द्वारा स्थापित जर्मन साम्राज्य 25 घटकों का संमिश्र राज्य था। इन 25 में से 22 राज्यों में राजतंत्र था और 3 जनतंत्र वाले नगर राज्य थे। आप सब जानते हैं कि समयानुसार उनका यह अलग स्वरूप समाप्त हुआ और एक संविधान के अधीन एक ही भूमि पर रहने वाले एकजुट लोगों का स्वरूप जर्मनी को मिला। जर्मनी से भी अधिक गति से भारतीय रियासतों का विलय होगा। 15 अगस्त, 1947 के दिन भारत में 600 रियासतें थीं। भारतीय रियासतों का भारतीय प्रांतों के साथ हुए एकीकरण से अथवा आपसी विलय से वा केंद्र द्वारा उन्हें केंद्रशासित प्रदेश का स्थान दिए जाने के कारण अब केवल 20 से 30 रियासतें ही बची हैं। विकास की यह प्रक्रिया बड़ी तेजी से हुई। बची हुई रियासतों का में आह्नान करता हूं कि वे भारतीय प्रांतों की भूमिका को अपनाते हुए तथा भारतीय प्रांतों की व्यवस्था के अनुसार ही वे भारतीय संघराज्य के पूर्ण घटक बनें। इससे भारतीय संघराज्य के लिए वे आवश्यक शक्ति प्रदान करेंगे। अपनी संविधान सभाओं का निर्माण करने और अपने स्वतंत्र संविधान निर्माण करने की परेशानियों से वे बचेंगे और जो उनके लिए मूल्यवान है उसमें से कुछ गंवाने की नौबत उन पर नहीं आएगी। उम्मीद करता हूं कि मेरा आह्नान व्यर्थ नहीं जाएगा। संविधान पारित होने से पूर्व राज्य और भारतीय संस्थानों के बीच के भेद हम समाप्त कर सकेंगे।

कुछ समीक्षकों ने इस बात पर आपत्ति की है कि मसौदा संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत का वर्णन यूनियन ऑफ स्टेटस् के तौर पर किया जाए। वे इसे फेडरेशन ऑफ स्टेटस् कहलाना चाहते हैं। केंद्रीभूत राज्य (Unitory States) वाले दक्षिण अफ्रीका का वर्णन संघ (Union) के तौर पर किया जाता है यह बात सही है। लेकिन कनाडा के फेडरेशन होने के बावजूद उसका वर्णन संघ के तौर पर ही किया जाता है। संविधान के फेडरल होने के बावजूद भारत का वर्णन संघ के तौर पर करने से शब्द रचना के प्रयोग को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचती। महत्वपूर्ण बात यह है कि संघ शब्द का प्रयोग जान-बूझ कर किया गया है। कनाडा के संविधान में संघ शब्द का प्रयोग क्यों