112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किया गया यह मैं नहीं जानता लेकिन मसौदा समिति ने उसका इस्तेमाल क्यों किया यह मैं आपको बता सकता हूं। मसौदा समिति यह स्पष्ट करना चाहती थी कि भारत भले फेडरेशन होने जा रहा है लेकिन राज्यों के आपसी करार न हो पाने के कारण यह फेडरेशन अस्तित्व में नहीं आया और फेडरेशन किसी करार का परिणाम न होने के कारण किसी भी राज्य को उससे अलग होने का अधिकार नहीं रहेगा। फेडरेशन यूनियन है क्योंकि वह अविभाज्य है। प्रशासन की सुविधा के लिए देश और लोगों का विभिन्न राज्यों में भले विभाजन किया जाता हो, देश पूरी तरह एक है। एक ही स्रोत से निर्माण हुए एक सार्वभौम राज्य की अधिसत्ता में रहने वाले ये लोग एक हैं। अमेरिकी फेडरेशन अविभाज्य है और किसी राज्य को उससे अलग होने का अधिकार नहीं है यह साबित करने के लिए अमेरिकी लोगों को गृहयुद्ध करना पड़ा था। इसलिए मसौदा समिति ने सोचा कि यह मसला तर्क या विवाद के सुपूर्द करने के बजाय शुरुआत में ही इसे साफ तौर पर अंकित किया जाए।
संविधान सुधार से संबंधित प्रावधानों की मसौदा संविधान के समीक्षकों ने कठोर आलोचना की है। कहा गया है कि मसौदे में शामिल प्रावधानों के कारण उनमें सुधार करना कठिन होने वाला है। सुझाव है कि कम से कम शुरुआती कुछ सालों में केवल बहुमत के सहारे संविधान में सुधार करना आसान होना चाहिए। असल में यह दलील चतुराई पूर्ण और चालाकी भरी है। कहा यह भी गया है कि संविधान सभा वयस्क मतदान पद्धति से नहीं चुनी गई है। उल्टे भविष्य में संसद वयस्क मतदान पद्धति से चुनी जाने वाली है। इसके बावजूद संविधान सभा को सादे बहुमत के आधार से संविधान मंजूर कराने का अधिकार दिया गया है। दूसरी ओर, भविष्य में संसद के लिए यह अधिकार नहीं दिया गया है। यह बेमेल बात मसौदा संविधान के कारण ही होने की बात भी खुले आम कही जा रही है। मुझे इस आरोप का खंडन करना ही होगा क्यों कि इसका कोई आधार नहीं है। मसौदा संविधान के संविधान सुधार संबंधी प्रावधान कितने सीधे सादे हैं यह समझने के लिए अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संविधानों में सुधारों के प्रावधानों का अध्ययन करना होगा। उनके साथ तुलना करने के बाद पता चलेगा कि प्रस्तावित संविधान में सुधार के प्रावधान सबसे अधिक सरल हैं। परंपरागत संकेत अथवा सर्वमत जैसी उलझन भरी और कठिन कार्यपद्धति मसौदा संविधान ने अपनाई नहीं है। सुधार लाने के अधिकार केंद्रीय अथवा प्रांतीय विधिमंडल को सौंपे हैं। कुछ खास विषयों में जो बहुत ही कम हैं सुधार के लिए राज्य विधानसभा से मंजूरी की जरूरत होगी। संविधान के अन्य सभी अनुच्छेदों में सुधार करने का अधिकार संसद को दिया गया है। रोक केवल यही होगा कि सदन में उपस्थित और मतदान में हिस्सा लेने वाले सदस्यों के दो तिहाई से अधिक बहुमत से और हर सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत से सुधार मंजूर होंगे। संविधान में सुधार करने के लिए इससे आसान तरीके की कल्पना करना मुश्किल है।