114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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जिन्हें काम करना पसंद है उन्हें मौका दें, आपस में झगड़े नहीं
मुंबई शेड्यूल्ड कास्ट्स् फेडरेशन की ओर से 22 दिसंबर, 1948 के दिन मुंबई के आर. एम. भट हाइस्कूल में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और आयुष्यमती माईसाहब अम्बेडकर को जलपान के लिए आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने सम्बोधित किया-
सभाधिपति, बहनों आर भाइयों,
मुझे पक्का याद नहीं है, लेकिन, शायद 1946 में जो चुनाव हुए थे तब यही पर एक सभा का आयोजन किया गया था। उस समय मैं उपस्थित था। आज मैं यहां उपस्थित हूं तो सहज ही उस वक्त हुई सभा की याद ताजा हो गई। कहना पड़ेगा कि 1946 के चुनावों में हमने और हमारी पार्टी ने असफलता का बहुत बड़ा भार अपने कंधों पर लिया था। चुनाव हारने को लेकर बुरा मानने की कोई जरूरत नहीं। असफलता के बारे में मुझे कभी बहुत अफसोस नहीं होता। क्रिकेट में कभी किसी टीम की हार होती है कभी किसी टीम की जीत होती है। हारने वाली टीम आगे कभी जीत भी सकती है और जीतने वाली टीम आगे कभी हार भी सकती है। चुनावी हार-जीत भी कुछ-कुछ ऐसी ही होती है। पिछले चुनावों में अगर काँग्रेस ने हमें केवल हराया होता तो उसमें कोई खास बुरा मानने वाली बात नहीं थी। लेकिन उस दौरान काँग्रेस ने हमारे साथ जो जोर-जुलुम और अत्याचार किए वैसा अत्याचार भारत में और कहीं शायद ही हुआ हो। नायगांव की 17 नंबर वाली चाल में कितना भयंकर वाकया हुआ था। महिलाओं का बाहर निकलना तक नामुमकिन हो गया था। नायगाव में मसाला पीसने की एक दुकान है। वहां काम करने वाली एक अस्पृश्य महिला को स्पृष्य गुंडे उठा कर ले गए। उसके साथ बलात्कार किया और उसके कपड़े छीन कर उसे नग्नावस्था में छोड़ दिया। ऐसा अमानवीय अत्याचार था।
तब कइयों के मन में आशंका थी कि क्या हिंदुओं से लड़ना समझदारी होगी? आप में से भी कइयों को ऐसा ही लगा था। हर किसी के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी थी। कई लोगों ने कहा भी था कि अम्बेडकर का साथ देना कहां तक सही होगा? मैं खुद भी चिंता में पड़ गया था। मेरा साहस भी मेरा साथ छोड़ रहा था। लेकिन आपकी आज
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रांची भाषणेः मा फ गाजरे, खंड 7, पृष्ठ 26-28