116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चुनाव हों लेकिन अच्छे माहौल में हों। उनके कारण भेदभाव न फैलें। मेरी राय में काम करने का जिन्हें शौक हो उन्हें जरूर मौका देना चाहिए। लेकिन आपस में लड़ाई-झगड़े न हों। मुझे लगता है कि अगर झगड़े होने वाले हैं तो इलेक्शन ही न हों।
एक और बात मैंने सुनी है कि म्युनिसिपाल्टी वाले हमारे कार्पोरेटर्स कुछ काम नहीं करते। किसीने मुझे यह भी बताया कि आपकी पार्टी का प्रमुख भी कुछ काम नहीं करता। अगर प्रमुख काम नहीं करता तो मेरा कोई आग्रह नहीं कि आप उसकी बात सुनें। आप आजाद हैं। जो काम नहीं करता उसे झटक देने की आजादी आपके पास है। मैं कभी आपसे नहीं कहूंगा कि आप किसी की गुलामी करें।
मैंने यह भी सुना है कि कार्पोरेटर्स को क्या-क्या काम करने चाहिए यह तय करने के लिए एक एडवायजरी बोर्ड की स्थापना की गई है। मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। सलाह देने वाले लोग बड़े विद्वान हैं या अनुभवप्राप्त हैं ऐसी बात नहीं है, बिना वजह विवाद बढ़ेंगे।
इस समस्या के हल के तौर पर कार्पोरेटर हर पवखाड़े या महीने में फेडरेशन के कार्यकर्ताओं की मीटिंग करें और इस मीटिंग में कार्यकर्ता अपने काम की रिपोर्ट कार्पोरेटर्स को दें। कार्पोरेशन में कौन-कौन काम किए, मीटिंगों में उपस्थित थे या नहीं, अगर थे तो जाग रहे थे या सो गए थे आदि बातों की रिपोर्ट कार्पोरेटर्स फेडरेशन की मीटिंग में दें और बताएं कि फेडरेशन के कार्यकर्ता ‘‘फलां-फलां प्रस्ताव रखें’’।
और मुझे कुछ नहीं कहना। इलेक्शन आने ही वाले हैं। अगले साल पूरे देश में चुनाव होंगे, उनकी तैयारी करो। इतना कह कर मैं आपसे विदा लेता हूं।