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कहना चाहता हूं। संगठन तोड़ कर दो-चार लोगों का अलग संगठन में शामिल होना आत्मघात कर लेने जैसा है। हमें समूह बना कर ही रहना होगा यह आप जानते हैं।
अपना घर तोड़ कर दूसरों के घर में घुसना बड़ी मूर्खता है। अपनी कुटिया को सुरक्षित रखिए। अगर ऐसा नहीं किया तो ब्राह्मणेतर दल की तरह ही हमारी भी हालत होगी। ब्राह्मणेतर दल की क्या दुर्दशा हुई सब जानते हैं। 1932 तक हम मिल-जुल कर काम किया करते थे। तब कुछ ब्राह्मणेतर नेताओं को लगा कि काँग्रेस से अलग रह कर कोई फायदा नहीं है। काँग्रेस में शामिल होकर अंदर से कुतर कर उनका गढ़ तोड़ा जा सकता है। बाहर से यह किला तोड़ा नहीं जा सकेगा। यही सोच कर वे काँग्रेस में शामिल हुए। मैंने कई बार उन्हें चेतावनी दी, लेकिन वे मेरी बात नहीं माने। लेकिन आज ब्राह्मणेतर लोगों को लगता है कि उनसे भयंकर गलती हुई है। आज ब्राह्मणेतर दल नामशेष रह गया है। अपनी कुटिया को वे कब तक संभाल पाएंगे इस बात को लेकर मैं सशंक हूं।
अपना घर तोड़ कर समझौता करना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं। हम अपनी घर की कीमत पर कुछ नहीं करेंगे।
पहले मुझ पर इल्जाम लगाया जाता था कि मैं देश के लिए घातक बातें करता हूं। लेकिन अब उन आरोपों का झूठ सबके सामने है। हमारा दल कभी भी देश के विरोध में नहीं था। हमारे दल ने देश के साथ कभी द्रोह नहीं किया। वह हमारे खिलाफ षडयंत्र था। हमारा पक्ष अगर प्रतिस्पर्धा में उतरा तो कोई इससे पार नहीं पा सकता। हम ही हमेशा आगे रहेंगे। (तालियां)
असली समाजवाद की स्थापना केवल हम ही कर सकते हैं। किसानों मजदूरों के राज की स्थापना हम ही कर सकते हैं। क्योंकि हममें अमीर कोई नहीं है और न ही कोई मध्यवर्ग है। हम सब कामगार मजदूर गरीब हैं। हम ही जनतंत्र निर्माण कर सकेंगे। इतना ही नहीं कम्युनिस्टों का कम्युनिज्म भी राजनीति में हमसे पीछे ही है। सैद्धांतिक रूप में कभी हमारे दल के पिछड़ने की संभावना नहीं है। हमारे देश में कई दल हुए। उन सबको हमसे ईर्ष्या होती है। काँग्रेस का अपवाद छोड़ दें तो भारत में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन जैसा कोई दूसरा दल नहीं है। सबका ध्यान हमारे दल की तरफ है। हमारा दल गुड़ की डली की तरह है और अन्य दल चींटियों की तरह हैं। हमारे पक्ष से सहायता पाने के लिए ये अन्य पक्ष चींटियों की तरह चिपकने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए उनसे हमें बहुत सजग रहना होगा।
अपने लोगों की नैतिकता साफ-सुथरी हो। अस्पृश्यों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। इस बारे में मन में यकीन रखिए। काँग्रेस कहती है कि विदेशी सत्ता को भगा कर वह क्रांति ले आई है। इसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं। लेकिन यह क्रांति अधूरी है। सच्चा जनतंत्र अगर निर्माण करना हो तो पिछले हजारों सालों से सिर पर नाचने वाला