258 21-1-1949 दूसरों पर निर्भर रहने की वृत्ति को त्याग कर एकजुट हों और संगठन को प्रभावी बनाएं - मनमाड़ - Page 140

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दूसरों पर निर्भरता को त्याग कर एकजुट हों

और संगठन को प्रभावी बनाओ

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और माईसाहेब अम्बेडकर का सत्कार समारोह मनमाड़ में बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ। उसके बाद उन्होंने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 16 जनवरी, 1949 की मध्यरात्रि से हैदराबाद संस्थान के दौरे की शुरुआत की। रात के डेढ़ बजे वे मनमाड़ स्टेशन से रवाना हुए। 17 जनवरी, 1949 के दिन तड़के वे इस दौरे के पहले स्थान पर अर्थात् औरंगाबाद पहुंचे। वहां तक की यात्रा के दौरान ट्रेन जिन स्टेशनों पर रुकी वहां-वहां उनका सम्मान समारोह हार्दिकता के साथ संपन्न हुआ।

हर स्टेशन पर अस्पृश्य जनता बड़ी संख्या में उपस्थित थी। गैसबत्तियां, रंगबिरंगी कागजी पताकाओं से लगभग सभी स्टेशन सजाये सभी विभिन्न मतों को मानने वाले गए थे।

औरंगाबाद स्टेशन पर जनता की अभूतपूर्व भीड़ जमा थी। सभी दलों के लोग डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए वहां उपस्थित थे।

सैंकड़ों पुष्पगुच्छ एवं फूलमालाएं डॉ. बाबासाहेब और माईसाहब अम्बेडकर को अर्पण किए गए। उस वक्त हर ओर ‘‘भीम भगवान की जय’’ का नारा गूंज रहा था।

पुरानी याद

औरंगाबाद के सिविल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर आयु. राजवाड़े, डीएसपी आयु. अश्ेकर और अन्य पुलिस अधिकारी अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ उपस्थित थे। पुलिस का ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ यानी सम्मान के साथ अभिवादन स्वीकार कर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपने सभी दोस्तों के साथ आयु. अश्ेकर की गाड़ी में बैठ और औरंगाबाद में स्थापित किए जा रहे सिद्धार्थ कॉलेज की जगह का मुआयना करने के लिए गए। कॉलेज के लिए तय की गई जगह देखने के बाद औरंगाबाद शहर के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल भी उन्होंने देखे। ‘पनचक्की’ देवते हुए डॉ. बाबासाहेब को 10-11 साल पुरानी एक बात याद आई। दिल खोल कर वह हंसे और तुरंत आयु. भाऊराव गायकवाड़ को बुला कर याद दिलाया कि 10-11 साल पहले औरंगाबाद के मुसलमानों द्वारा दौलताबाद का किला देखते हुए उनका अपमान यह कह कर किया था कि ‘आप नीच जाति के हैं...’। एक बार

जनता, 5 फरवरी, 1949