258 21-1-1949 दूसरों पर निर्भर रहने की वृत्ति को त्याग कर एकजुट हों और संगठन को प्रभावी बनाएं - मनमाड़ - Page 141

122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फिर हंस कर डॉक्टरसाहब ने कहा, ‘वही मुसलमान आज मुझे अपने जूतों समेत उनके भगवान के पास ले जाने के लिए भी तैयार हैं।’ पनचक्की के पड़ोस में स्थित मस्जिद में ढाई-तीन सौ साल पहले हुए किसी फकीर के कपड़े बेहद एहतियात से रखे हुए देख कर तथा उस पर की गई कढ़ाई को देखते हुए उन्होंने प्राचीन कलावैभव की प्रशंसा की। फिर वहीं कुछ देर तक आराम करने के बाद उन्होंने ठंडा पानी पिया। उस वक्त एक मुसलमान फोटोग्राफर ने उनकी कई तस्वीरें खींची। कुछ देर आराम करने के बाद बाबासाहेब औरंगाबाद के स्टेट गेस्ट हाउस में दोपहर के भोजन के लिए लौट आए।

हैदराबाद के लिए रवाना

उसी दिन शाम की गाड़ी से वह हैदराबाद के लिए रवाना हुए। औरंगाबाद आते हुए हर स्टेशन पर जिस प्रकार उनका स्वागत हुआ था, उसी प्रकार औरंगाबाद से सिकंदराबाद के बीच के स्टेशनों पर भी हुआ। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर हैदराबाद आ रहे हैं इस बात की खबर हैदराबाद दलित फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने वहां की दलित जनता को 4-5 दिन पहले ही बता दी थी। तभी से बाबासाहेब के आने का इंतजार हर स्टेशन पर अस्पृष्य जनता द्वारा किया जा रहा था। 18 जनवरी, 1949 को तड़के ही नांदेड़ स्टेशन पर गाड़ी पहुंची। उस वक्त बाबासाहेब सोए हुए थे। उन्हें जगा कर तकलीफ न देने के उद्देश्य से हैदराबाद संस्थान शेडुल्ड कास्ट फेडरेशन के सचिव श्री मनोहर ने सभी लोगों से विनम्र अनुरोध करते हुए लौट कर आते वक्त उन्हें बाबासाहेब के दर्शनों का लाभ कराने का आश्वासन दिया। दिनांक 20 जनवरी, 1949 के दिन औरंगाबाद लौटते हुए गाड़ी उसी नांदेड़ स्टेशन पर जब पहुंची तब भी रात का ही समय था। पता चला कि वहां दिनांक 18 जनवरी, 1949 को आई अस्पृश्य जनता 21 जनवरी, 1949 तक वहीं जम कर बैठी थी। खाली पेट, खुले में, ठंड-हवा सहते हुए सभी लोग बाबासाहेब के दर्शनों के लिए वहां चार दिनों से रुके हुए थे।

21 जनवरी, 1949 को तड़के ही गाड़ी ने औरंगाबाद स्टेशन में प्रवेश किया। एक बार फिर माहौल जयघोष की ध्वनि से और फूलमालाओं से लद गया। गार्ड ऑफ ऑनर का कार्यक्रम हुआ।

हैदराबाद के सिविल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर श्री प्रधान, औरंगाबाद के सीएओ श्री आयु. राजवाड़े, डीएसपी आयु. अश्ेकर के साथ डॉ. बाबासाहेब औरंगाबाद गेस्ट हाउस गए। वहां एक पार्टी हुई। पार्टी में स्टेट काँग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा बाबासाहेब को फूलमालाएं और पुष्पमालाएं पहनाई गईं। पूछा गया कि अस्पृश्य जनता के लिए हम क्या करें? बाबासाहेब ने सब को एक ही जवाब दिया कि आप सब लोग शाम के समय सभा स्थल पर आइए। वहीं आम जनता के सामने ही मैं आपको अस्पृश्योद्धार का मार्ग बताऊंगा और दिखाऊंगा।