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शाम के 5.30 बजे वह मराठा विद्यालय देखने गए। इसी प्रकार अन्य संस्थाओं में जाकर वहां के लोगों से मिल कर डॉ. बाबासाहेब ठीक समय पर सभास्थल पर पहुंचे।
एक लाख की विराट सभा
सभा के पंडाल का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। उस जगह को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था। कुल 18 लाऊडस्पीकर्स लगाए गए थे। इसी से सभा-सम्मेलन जिन्होंने देखे हैं उन लोगों को इस बात का अंदाजा हो जाएगा कि वहां कितने लोग इकठ्ठा हुए थे। एक लाख से अधिक लोग वहां इकठ्ठा हुए थे।
औरंगाबाद स्टेट दलित फेडरेशन के सचिव आयु. बी. एस. मोरे ने शुरुआती भाषण दिया। हैदराबाद संस्थान में अस्पृश्य जनता पर हुए घोर अत्याचारों के बारे में उन्होंने अपने भाषण में बताया। उनके बाद अखिल भारतीय शेडुल्ड कास्ट फेडरेशन के उपसचिव आयु. पां. ना. राजभोज ने फेडरेशन की नीति के बारे में और संगठन के बारे में जानकारी दी। उनके बाद आयु. गायकवाड़ ने 5-10 मिनटों के भाषण में वहां उपस्थित लोगों को अपने महान नेता का भाषण अत्यंत शांति से, सुनने का अनुरोध किया।
मातंग समाज के प्रमुव कार्यकर्ताओं ने मातंग जाति के लोगों को फेडरेशन में शामिल होने और अपना उत्कर्ष साध्य करने की सलाह दी। आयु. मोरे ने बताया, ‘हम सभी पतित जनता के सच्चे उद्धारक बाबासाहेब अम्बेडकर ही हैं।’
उनके बाद डॉ. बाबासाहेब ने कहा-
जब तक आप अपने मजबूत संगठन के बल पर अपनी ताकत दुनिया को दिखा नहीं देंगे तब तक आप पर इस तरह के अत्याचार होते ही रहेंगे। अन्याय अत्याचार को संगठित होकर ही हमें रोकना होगा। इस संदर्भ में आपको वेदों में लिखी एक कहानी सुनाने का मेरा मन है। एक बार एक बकरा भगवान के पास शिकायत लेकर गया। उसने कहा- भगवान, तुमने सारी दुनिया बनाई। पशु-पंछी, पेड-पौधे, मनुष्य-प्राणि आदि संपूर्ण चराचर की तुमने निर्माण किया। इसी नाते तुम हमारे पिता और हम तुम्हारी संतानें हुए। यानी रिश्ते में हम सब भाई-भाई हुए। तुम्हारे ही बनाए शेर-सिंहों द्वारा तुम्हारी आंखों के सामने हम बकरियों को बिना किसी लाज-लिहाज के, बिना किसी पाप-पुण्य की परवाह किए खा जाना क्या ठीक है? इस पर भगवान ने जवाब दिया, सही है, वास्तविकताएं तुम्हारे कहे अनुसार ही हैं। लेकिन उसी के साथ यह बात भी सही है कि तुम्हारा बाह्य स्वरूप इतना डरपोक, बेचारा दिखाई देता है कि इस वक्त तुम्हारा निर्माता होने के बावजूद तुम्हें खा जाने का मेरा मन कर रहा है। हमेशा इस प्रकार गर्दन को झुकाए रहने के बजाए गर्दन थोड़ी ऊंची करो। चौकन्ने दिखाई देने की कोशिश करो। रौबदार बनो। तुम पर हमला करने वाले का प्रतिकार करने की न्याय बुद्धि के साथ यथाशक्ति कोशिश करो औरों पर निर्भर मत रहो। मुक्के का जवाब मुक्के से दो। फिर देखें तो सही, कौन