258 21-1-1949 दूसरों पर निर्भर रहने की वृत्ति को त्याग कर एकजुट हों और संगठन को प्रभावी बनाएं - मनमाड़ - Page 143

124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तुम्हें परेशान करेगा? कौन तुम्हें खाएगा? इस कहानी के अनुसार मैं आपसे कहता हूं कि आप लोग परावलंबी बन कर रहने की मानसिकता त्याग कर एकजुट बनो, प्रभावी संगठन बना कर रहो।

कुछ काँग्रेस वाले आपके साथ यह कह कर धोखा करेंगे कि मैं काँग्रेस में चला गया हूं। आप ऐसे लोगों की बातों में न आएं। मैं काँग्रेस में न कभी गया था न जाऊंगा। अगर कभी ऐसी नौबत आए तो मिलने वाले सभी सम्मान को लात मार कर मैं अपना ध्येय पूरा करूंगा।

अब स्पृश्यवर्गीयों द्वारा मेरा सम्मान किया जाता है। बडे-बडे अधिकारी मेरा सम्मान करते हैं। आज इन लोगों को अगर मुझसे डर लगता है तो उसकी वजह उनके इस यकीन में है कि मेरे पीछे अत्यंत प्रभावी और राजनीति के धुरंधर लोगों की शक्ति है। इसीलिए मैं कहता हूं कि यह सम्मान, यह गौरव मेरा नहीं है, यह आप लोगों का है जिन पर उन लोगों ने अत्याचार किए थे। मैं केवल निमित्त मात्र हूं। आप पर हुए और हो रहे अत्याचार की शिकायत मैं करूंगा और कोशिश भी करूंगा कि उसके जरिए क्या क्या पाना है हमें। आपको बस अपनी संस्था को एक रखते हुए मजबूती से संगठित रहना है।