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की गई है उसके अनुसार संयुक्त परिवार के हर सदस्य का हिस्सा अलग से उसके नाम पर दर्ज होगा। यह कोई बहुत ही क्रांतिकारी बात बिल्कुल नहीं है। आप सब जानते हैं कि आजकल के जमाने में हर कोई अलग रहना चाहता है। इसलिए इस कोड के जरिए भले संयुक्त परिवार का संयुक्त अधिकार हटाया गया हो, लेकिन संयुक्त परिवार व्यवस्था को बनाए रखा है। अर्थात् अब ‘मिताक्षर’ कानून की जगह ‘दायभाग’ कानून लेगा। इस कानून द्वारा इतनी ही व्यवस्था की गई है।
महिलाओं को विरासत में मिलने वाली संपत्ति की बात बेहद पेचीदा है। इस मामले में 1. स्त्रीधन 2. विधवा की संपत्ति, ये दो हिस्से बनाए गए हैं। जो संपत्ति पुरुष की ओर से विरासत अधिकार के तहत महिला को मिलती है उसे विधवा की संपत्ति कहा गया है। इस बारे में सिलेक्ट कमेटी का निर्णय है कि महिला में जब अन्य मामलों में अपनी संपत्ति की देखभाल के लिए जरूरी चतुरता और सामर्थ्य होता है, तो यह भी मान लेना चाहिए कि विधवा की संपत्ति की देखभाल के लिए भी वह चतुर और समर्थ है। मैं अगर सदियों के हिंदू संस्कृति और कानूनों से पीडि़त महिलाओं को न्याय देने में सफल हुआ तो मेरा जन्म सार्थक हुआ ऐसामैं मानूंगा। इसीलिए इस हिंदू कोड में दर्ज किया गया है कि महिला को मिलने वाली संपत्ति पर उसका पूरा और नियंत्रणरहित मालिकियत का अधिकार है।