136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आधुनिकता के साथ इन गुणों से युक्त मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस संविधान सभा के माध्यम से नेतृत्व किया और इस संदर्भ में निर्माण हुए सभी उलझी गुत्थियों को हल किया।’’ ख्3,
बेगम ऐज़ाज रसूल - ‘‘संविधान ने भारतीय जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को मूर्त रुप प्रदान किया है। शब्दों योजना, प्रावधानों की कसौटियों पर संविधानों का अगर मूल्यांकन करना हो तो दुनिया के संविधानों में ये संविधान श्रेष्ठ प्रकार का साबित होगा। इस बारे में हमारे मन में संविधान के प्रति जो गर्व की भावना है वह न्यायोचित ही कहलाएगी। इस मेहती मार्गदर्शक कार्य के लिए मैं डॉ. अम्बेडकर और मसौदा समिति के सदस्यों का अभिनंदन करती हूं।
धर्मनिरपेक्षता हमारे संविधान की महत्वपूर्ण विशिष्टता है। धर्मनिरपेक्षिता का आग्रहपूर्वक प्रतिपादन हमारे संविधान की पवित्रता है और हमें इस पर गर्व है। इस धर्मनिरपेक्षिता की भावना को हमेशा बल मिलेगा और कभी उसे कलंकित नहीं किया जाएगा इसका मुझे पूरा भरोसा है। भारत के लोगों की एकता इसी पर निर्भर है। उसके बगैर विकास की आशा-आकांक्षाएं व्यर्थ साबित होंगी।’’ ख्4,
संविधान सभा के रोजमर्रा के काम की वबरें दिल्ली और बाहर के अखबारों को देने की जिम्मेदारी जे. पी. चतुर्वेदी नामक एक विख्यात पत्रकार को सौंपी गई थीं। श्री चतुर्वेदी को भारतीय पत्रकारिता आंदोलन का जनक माना जाता है। संविधान निर्माण के कार्य में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के योगदान के बारे में वह कहते हैं। उस जमाने में उन्हें करीब से देखने का उच्चतम अवसर मिला। डॉ. बाबासाहेब को चुनौती देना असंभव था। वह दुनिया के सभी संविधानों के विद्वान थे। उनसे चर्चा करने का मौका मिलना बौद्धिक दावत हुआ करती थी और मुझे ऐसे मौके मिला करते थे।
उनके बारे में जानकारी देते हुए ज्यादातर यही बताया जाता है कि उन्होंने दलितों अन्य पिछड़े वर्गों, आदिवासियों अल्पसंख्यकों और शोषितों के उद्धार के लिए संघर्ष किया। लेकिन नए भारतीय गणतंत्र की बुनियाद खड़ी करने के लिए उनके योगदान का जिक्र नहीं किया जाता। उन्हें आधुनिक मनु कहा जाता है। जिस समाज से उनका उदय हुआ उस समाज के हित के लिए उन्होंने न केवल नए कानून बनाने की कोशिश की बल्कि नए कानून दिए भी। भारत में तब जनतंत्र शैशवावस्था में था, उन्होंने संविधान के रूप में कानून दिया। संविधान निर्माण करने वाले संविधान सभा के पितामह को जब हम याद करते हैं उस वक्त हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की संविधान सभा में डॉ. अम्बेडकर सबसे श्रेष्ट व्यक्तित्व थे। प्रत्यक्षतः उन्होंने वर्तमान संविधान की रचना की। भारतीय प्रजातंत्र की उत्क्रांति को सुव्यवस्थित करने के लिए और देश की अखंडता
Dr. Babasaheb Ambedkar : Writings and Speeches, Vol. 13, PP - 1169&70
Dr. Babasaheb Ambedkar : Writings and Speeches, Vol. 13, PP - 1179