138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संविधान सभा के कार्य का मैं हर रोज निरीक्षण करता आया हूं। संविधान सभा की मसौदा समिति द्वारा कितने उत्साह, निष्ठा और लगन के साथ काम को पूरा किया इसका अहसास किसी और से अधिक मुझे है। खासकर मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर ने अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बगैर इस काम को पूरा किया है। (तालियां) मसौदा समिति और उसके अध्यक्ष पद के लिए उन्हें चुनने का जो निर्णय हमने लिया उससे बेहतर और उचित निर्णय कोई और नहीं था। उनका चुनाव सार्थक था यह साबित कर दिवाया। इतना ही नहीं, उन्होंने जो कार्य किया उससे उनके कार्य को एक ओज प्राप्त हुआ। इस संदर्भ में समिति के अन्य सदस्यों के बीच भेदभाव करना ठीक नहीं होगा। मैं जानता हूं कि अध्यक्ष की तरह ही सभी ने अपनत्व और निश से कार्य किया है। राष्ट्र उन्हें धन्यवाद दे वे इस योग्य हैं।’’ ख्8,
उसके बाद देश-विदेश में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का सम्मान होता रहा। चिरंतन ध्यान में रहे ऐसा महत्वपूर्ण राष्ट्रकार्य उन्होंने किया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने संविधान के सहारे अस्पृश्यता को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था। इतना ही नहीं वरन् उन्होंने भारतीय जीवन में स्वतंत्रता, समानता, बंधुभाव और न्याय जैसे श्रेष्ठ जीवनमूल्यों को स्थापित किया था। इसीलिए दुनिया के एक महान संविधान विशेषज्ञ के तौर पर उनका नाम हुआ। विख्यात राज्यविज्ञानी और ऑक्सफर्ड तथा केंब्रिज विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अर्नेस्ट वार्कर ने 1951 में अपना प्रिंसिपल्स ऑफ सोशल एंड पोलिटिकल थियरी ग्रंथ प्रकाशित किया। उन्होंने वह भारतीय संविधान की प्रस्तावना को समर्पित किया है। इस ग्रंथ की भूमिका में वह कहते हैं, ‘मेरे इस ग्रंथ का सार इस भूमिका में समाया हुआ है। भारतीय जनता द्वारा अपनी स्वतंत्रता का आरंभ करने से पूर्व इन श्रेष्ठ मानवी मूल्यों को अंगीकार किया इसका मुझे अभिमान है।’
भारतीय संविधान के शिल्पकार अम्बेडकर के कृतित्व का इससे बढ़ कर सम्मान और क्या हो सकता है!’’ ख्9, ।
ध्यान आकर्षित करने वाला अद्वितीय व्यक्तित्व
‘‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण करीब 55 मिनटों तक चला। संविधान समिति के भव्य हॉल में उस वक्त सुईपरक सन्नाटा था। सभी गैलरियां ठसाठस भरी हुई थी फिर भी किसी के सांस लेने की या हाथ-पैर हिलाने तक की आवाज नहीं थी। बेहतरीन वुलन सूट पहने, दूर से आकर्षक नजर आते, बीच-बीच में लोगों पर नजर डालते एक ही व्यक्ति पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं। वह व्यक्ति थे डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर।
डॉक्टर साहब के भाषण की शुरुआत में और अंत में तालियों की जो गड़गड़ाहट
Dr. Babasaheb Ambedkar : Writings and Speeches, Vol .13, PP 1219.
डॉ अम्बेडकरः संविधान के शिल्पिः आयु. शांताराम शंकर रेगे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर गौरव ग्रंथ
समिति, महाराष्ट्र राज्य साहित्य और संस्कृति मंडल, मुंबई, पृ. 358.