262 25-11-1949 राजनीतिक दल अपने तत्वों को देश से बड़े मानने लगें तो आजादी खतरे में आएगी - नई दिल्ली - Page 161

142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्षमता शायद ही किसी और में हो। वह समिति की एक बहुमूल्य रत्न हैं। उनके सहयोग के बगैर संविधान को पूरा करने के लिए समिति को कई वर्षों तक काम करना पड़ता। आयु. मुखर्जी के तहत काम करने वाले कर्मचारियों का जिक्र मुझे करना ही होगा। कितना मुश्किल काम उन्होंने पूरा किया है। कितना कठोर परिश्रम उन्हें करना पड़ा मुझे अहसास है कि कभी-कभी उन्होंने आधी-आधी रात तक जाग कर काम पूरा किया है। उनकी कोशिश और उनके सहयोग के लिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। (हर्षध्वनि)

संविधान सभा अगर विभिन्न घटकों का बिखरा हुआ समुदाय बन कर रहती तो, यहां काला पत्थर, वहां सफेद पत्थर दिखाई देने वाली सिमेंट के इस्तेमाल के बगैर बनी सड़क की तरह हर सदस्य और हर समूह अपने आप में एक कानून बन कर रहता, मसौदा समिति के लिए काम करना बेहद मुश्किल हो जाता। अफरातफरी के अलावा कुछ हाथ नहीं आता। समिति में काँग्रेस के अस्तित्व के कारण कामकाज व्यवस्थित और अनुशासनबद्ध ढंग से हो पाया। अफरातफरी पैदा होने का कोई मौका ही उत्पन्न नहीं हुआ। काँग्रेस पार्टी के अनुशासन के कारण ही संविधान समिति को संविधान के हर अनुच्छेद और हर संशोधन के भविष्य के प्रति यकीन हुआ और संविधान प्रस्तुत करना आसान हुआ। इसी कारण मसौदा संविधान सभा में आसानी से पारित होने का श्रेय काँग्रेस पार्टी को भी देना होगा।

सभी सदस्य अगर पार्टी के अनुशासन से बंधे रहते तो संविधान सभा का कामकाज बड़ा नीरस हो जाता। पार्टी की अनुशासन संबंधी कठोर नीति के कारण सभी केवल हामी भरने वाले समूह मात्र में परिवर्तित होकर रह जाते। संयोग से समिति में कुछ विद्रोही लोग भी थे। उनमें मुख्यतः आयु. कामत, डॉ. पी. एस. देशमुख, आयु. सिधवा, प्रो. सक्सेना और ठाकुरदास भार्गव का भी समावेश था। उनके साथ ही प्रो. के. टी. शाह और हृदयनाथ कुंजरू का जिक्र करना ही पड़ेगा। उनके द्वारा उपस्थित किए गए मुद्दे सैद्धांतिक थे, मैं उनकी सूचनाओं को स्वीकार नहीं कर पाया इसका मतलब उनकी सूचनाओं का मूल्य कम था ऐसा नहीं होता। समिति के कामकाज में जिंदादिल बनाए रखने के लिए उनके द्वारा दिए गए योगदान का महत्व कम नहीं होता। मैं उनके प्रति आभार प्रकट करता हूं। उनके बगैर संविधान के मौलिक सिद्धांतों को स्पष्ट करने का मौका मुझे नहीं मिलता। असल में संविधान पारित करने के तकनीकी हिस्से से भी यह अधिक महत्वपूर्ण है।

और, अध्यक्ष महोदय, इस सभा का कामकाज आपने जिस तरह सम्भाला उसके लिए आखिर में मुझे आपके प्रति आभार व्यक्त करना ही होगा। इस सभा के कामकाज में जिन सदस्यों ने हिस्सा लिया, उनके साथ जो आप अपनत्व और सम्मान के साथ पेश आए यह कभी भुलाया नहीं जा सकता। मसौदा समिति द्वारा प्रस्तावित कुछ सुधार केवल तकनीकी से संबंधित होने का कारण बताते हुए नकारने की कोशिश हुई। मेरे लिए वे क्षण बहुत ही चिंताजनक थे। संविधान निर्माण के कार्य को असफल बनाने के उद्देश्य से आगे ले आए गए कठोर कानून को आपने अनुमति नहीं दी इसलिए खास कर मुझे