263 11-1-1950 हिंदू कानून को सिलसिलेवार बनाना होगा। - मुंबई - Page 172

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लेकर आजकल बड़ा विवाद चल रहा है। इस बिल का पूरा विवेचन करना हो तो कम से कम दो घंटे का समय लगेगा। इतना समय न आपके पास है न मेरे पास। हालांकि, आप छात्र हैं, जागरुक हैं, जानकार हैं इसलिए, कम समय में हिंदू कोड बिल पर मैं अपने विचार आपके सामने रखने की कोशिश करता हूं।

अभी आप छात्र हैं, इस बिल के अनुच्छेदों की सिलसिलेवार जानकारी आपको नहीं होगी। आप अपने पाठ्यक्रम, पढ़ाई और परीक्षा में व्यस्त होते हैं। लेकिन यह बिल आज के तथा भावी पीढ़ी के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण तथा इसके कारण देश को कौन-कौन से लाभ मिलने वाले हैं यह एक नागरिक के नाते आपको पता होना चाहिए, इसलिए इस बिल के बारे में मैं कुछ विशेष जानकारी आप लोगों को दे रहा हूं।

हिंदू कोड बिल के मुख्यतया दो उद्देश्य हैं। हिंदू कानून को पूरे देश में सूत्रबद्ध करना यह पहला उद्देश्य है। इसे अंग्रेजी में कोडिफिकेशन यानी कूटबद्ध करना कहते हैं। दूसरा उद्देश्य है हिंदू कानून की कुछ शाखाओं में सुधार लाना। इस दूसरे उद्देश्य पर ही फिलहाल छिड़ा हुआ विवाद केंद्रित है।

पहले उद्देश्य के बारे में बोलना हो तो बता दूं कि उसको लेकर कोई विवाद नहीं है और होना संभव भी नहीं है। हिंदू कानून के सुसूत्रीकरण को लेकर सबकी सहमति है। किसी भी कानून के लिए मूलभूत कसौटियों की पूर्ति करनी पड़ती है और ऐसी ही कसौटियां हिंदू कानून के बारे में होना भी जरूरी है।

किसी भी कानून का तीन मूलभूत कसौटियों पर खरा उतरना जरूरी होता है। ये कसौटियां हैं-

  1. कानून का निश्चित होना जरूरी होता है। उसके किसी भी अनुच्छेद को अथवा

प्रावधानों को लेकर संदिग्धता नहीं होनी चाहिए। उसका अर्थ स्पष्ट होना जरुरी

है। यह पहली कसौटी है।

  1. कानून सब जगह एक समान होना चाहिए। प्रादेशिक बदलावों से वह जकड़ा

हुआ न हो। मुंबई में हुए कत्ल के लिए आरोपी को जो सजा मिलेगी वही

त्रिचनाप८ी में हुए कत्ल के लिए वहां के आरोपी को मिलनी चाहिए। यह

दूसरी कसौटी है।

  1. सारी जनता जिसे समझ सके, उसका आश्रय ले सके ऐसा आकार में सुयोग्य

कानून होना चाहिए। अपने अधिकारों के बारे में हर नागरिक को पता होना

चाहिए। हर बात के लिए वकील पर निर्भर रहना पड़े ऐसा कानून न हो। यह

तीसरी कसौटी है।

इन कसौटियों के आधार पर अगर हिंदू कानून पढ़ा कर देखें तो क्या पता चलेगा? यही कि, उपरोक्त किसी कसौटी पर हिंदू कानून खरा नहीं उतरता। दुनिया के सबसे लचर कानून का उदाहरण देना हो तो हिंदू कानून का दिया जा सकता है। यह कानून