263 11-1-1950 हिंदू कानून को सिलसिलेवार बनाना होगा। - मुंबई - Page 173

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जितना अनिश्चित, सरड्ड प्रवाह या सिलसिले का अभाव होने वाला और महंगा कानून दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। इस बारे में और अधिक विवेचन की जरूरत नहीं है। हिंदू कानून में सरड्ड प्रवाह लाने की जरुरत है यह बात सभी मानते हैं।

अब हिंदू कोड बिल के दूसरे अर्थात् उसमें सुधार लाने वाले उद्देश्य के बारे में जानते हैं। जैसा कि मैंने ऊपर बताया है, विरोधियों ने इसी बात पर हंगामा खड़ा किया हुआ है। हिंदू कानून में इस बिल के जरिए क्या सुधार सुझाए गए हैं यह जानने के बाद विरोधियों का कथन सही है या गलत इस बात का पता चलेगा।

हिंदू कोड बिल के तहत कुल पांच सुधार सुझाए गए हैं। इन के बारे में थोड़ी जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।

पहले सुधार के तहत विवाह, बच्चा गोद लेना आदि के संदर्भ में जाति को लेकर है। पुराने और वर्तमान हिंदू कानून के अनुसार विवाह और बच्चा गोद लेना जातियों के अंदर ही हुआ करते थे और होते हैं। अगर किसी दूसरी जाति के व्यक्ति से विवाह हो या अन्य जाति से बच्चे को गोद लिया गया हो तो उस विवाह को और उस गोद लेने को रद्द माना जाता था। इस प्रकार हिंदू समाज और कानून दोनों जाति पर ही आधारित हैं। जिसकी कोई जाति नहीं वह हिंदू नहीं। हिंदू कोड बिल में यह बात नामंजूर की गई है। हिंदू कोड बिल के अनुसार जातियां नष्ट होने वाली हैं। नए कानून के अनुसार जाति के बंधन नष्ट होने वाले हैं इसलिए किसी भी जाति में विवाह और बच्चा गोद लेने की घटनाएं हो सकती हैं।

दूसरा सुधार एक पत्नीत्व के पालन संबंधी है। प्रचलित और पुरातन हिंदू कानून के अनुसार एक हिंदू पुरुष को कई महिलाओं के साथ विवाह करने की अनुमति है। बहुपत्नीत्व को लेकर मुसलमानों के कानून की समीक्षा की जाती है लेकिन हिंदू कानून और मुसलमानों के कानून में बहुत ज्यादा अंतर है। मुसलमानों के विवाह संबंधी कानून के अनुसार जो पुरुष चारों पत्नियों के साथ इन्साफ कर सकता हो अर्थात् जो उनके वैवाहिक जीवन को सुखी रख सकता हो केवल उसी को चार विवाह करने की अनुमति है। इस तरह की कोई शर्त हिंदू विवाह कानून में नहीं है।

हिंदू कानून के अनुसार एक पुरुष को कई महिलाओं के साथ शादी करने की सिद्धांततः इजाजत हो ऐसी बात नहीं है। हालांकि इस प्रकार के कई उदाहरण देखने में आते हैं। बंगाल में कुलीन विवाह पद्धति है। इस पद्धति के तहत पुरुष 500 महिलाओं के साथ विवाह कर सकता है। इसी को मानते हुए एक बंगाली पुरुष ने 500 शादियां की थीं। पंढरपूर मेले के दौरान पंडे जिस प्रकार यात्रा करने वालों के नाम-पते एक रजिस्टर में दर्ज करके रखता है उसी तरह इस बंगाली पुरुष ने अपनी सभी पत्नियों के नाम-पते, उम्र आदि एक रजिस्टर में दर्ज कर रखे थे। अलग-अलग गांवों में, हर जगह उसकी