264 11-1-1950 विदेशियों की गुलामी अगर दुबारा झेलनी पड़े तो वह आत्मनाश ही होगा - मुंबई - Page 179

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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विदेशियों की गुलामी अगर दुबारा झेलनी पड़े तो वह आत्मनाश

ही होगा

जल्द ही डॉ. बाबासाहेब मुंबई आने वाले हैं। जनवरी के पहले या दूसरे हफते में शायद वह मुंबई पहुंचेंगे। संविधान बनाने का महान कार्य सफलतापूर्वक पूरा करने के उपलक्ष्य में मुंबई शहर शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन ने तय किया है कि उनका शाही सम्मान और स्वागत समारोह की तैयारी के लिए मुंबई शहर दलित फेडरेशन के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की शीघ्र बैठक 1 जनवरी, 1950 के दिन बुलाई गई थी।

प्रसंगानुसार स्वागत

काँग्रेस के नेताओं और मंत्रियों का हमेशा स्वागत होता रहता है। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ ऐसी बात नहीं है। स्वयं डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को इस प्रकार स्वागत समारोह में हिस्सा लेना पसंद नहीं है। उनके लिए आयोजित स्वागत समारोह प्रसंग के अनुसार योग्य और भव्य होते हैं। आजाद भारत का संविधान बनाने का कार्य उन्होंने सफलतापूर्वक संपन्न किया इससे ऐसा कौन-सा अस्पृश्य है जिसका सीना गर्व से फूला हो। इसीलिए, मुंबई में उनके आगमन पर मुंबई में उनका भव्य एवं अभूतपूर्व स्वागत होगा।

स्वागत अभूतपूर्व होगा

25 जून, 1946 के दिन भी इसी प्रकार मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर उनका सार्वजनिक स्वागत हुआ था हालांकि उससे अधिक भव्य, अभूतपूर्व तरीके से उनका यहां स्वागत होगा इसमें कोई शक नहीं। मुंबई शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन को विश्वास है कि इस समारोह में 150000 लोग हिस्सा लेंगे।

स्वागत का दिन, समय और स्थान की जानकारी हैंडबिल के जरिए दी जाएगी।

स्वयंसेवकों के दल

स्वागत समारोह की व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों के दल तैयार किए जाएंगे। वर्दी के तौर पर वे सफेद आधी बाहों वाली कमीज और सफेद पैंट पहनेंगे। साथ ही उन्हें खास तरीके के बैचेज भी दिए जाएंगे। हर वॉर्ड से 25-30 स्वयंसेवकों को लिया जाएगा।

जनताः 31 दिसम्बर 1949 और 7, 14 जनवरी, 1950