264 11-1-1950 विदेशियों की गुलामी अगर दुबारा झेलनी पड़े तो वह आत्मनाश ही होगा - मुंबई - Page 180

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व्यक्ति और संस्थाएं अपना नाम दर्ज करें

जो व्यक्ति या संस्था डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमाला अर्पण करना चाहते हैं, उन्हें पहले मुंबई शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के दफतर में अपने नाम दर्ज कराने होंगे। ऐन समय पर हड़बड़ी न मचे इसलिए इस तरीके से काम करना पड़ेगा। स्वागत के लिए भव्य पंडाल खड़ा किया जाएगा। उसमें लाऊडस्पीकर की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रकार की सूचना मुंबई शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी की ओर से दी गई है।

भारत सरकार के कानून मंत्री नामदार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपनी पत्नी माईसाहेब अम्बेडकर के साथ सोमवार दिनांक 2 जनवरी, 1950 के दिन शाम 6.30 बजे दिल्ली से हवाई जहाज से यात्रा करके मुंबई के सांताक्रुज हवाई अड्डे पर उतरे। तब वह खुश लग रहे थे। उनके स्वागत के लिए मुंबई शहर और उपनगर शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के कार्यकर्ता उपस्थित थे। इसके अलावा अन्य अस्पृश्य भाई-बहनों की भीड़ सांताक्रुज हवाई अड्डे पर उनके दर्शन के लिए जुटी थी।

मनोहारी दृश्य और फूलमालाएं

डॉक्टरसाहब ने आते समय गैबर्डिन का सूट पहना था। माईसाहब ने उसी रंग से मिलते-जुलते रंग की जरी वाली साड़ी पहनी थी। डॉक्टरसाहब और माईसाहब जब हवाई जहाज से उतरे तब उन्हें ले जाने के लिए खड़ी टूरिस्ट गाड़ी के पास पहुंचे तब ‘अम्बेडकर जिंदाबाद’, ’थोडे दिनों में भीमराज’ जैसी घोषणाएं स्वागत के लिए वहां इकठ्ठा अस्पृश्य भाई-बहनों ने की। उसके बाद डॉ बाबासाहेब को पुष्पमाला अर्पण किए गए और उनकी गाड़ी वहां से चल पड़ी।

पता चला कि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर 13 जनवरी, 1950 तक मुंबई में रहने वाले हैं।

डॉ. बाबासाहेब के आगमन के समय मुंबई में उनका भरपूर स्वागत किया जाने वाला है। इस बात की जानकारी जनता के पिछले अंक में प्रकाशित की गई है। उसके लिए शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन मुंबई शहर और उपनगर शाखा की स्वागत समिति द्वारा जो जानकारी प्रचार के लिए दी वह इस प्रकार थी-

यह अत्यधिक हर्ष का विषय है कि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और भाईसाहब अम्बेडकर सोमवार दिनांक 2-1-1950 के दिन शाम 6.30 बजे मुंबई आए हैं। डॉ. बाबासाहेब के आगमन के लिए हम सब बहुत ही उत्सुक होते हैं। उस पर भारतीय संविधान की जिम्मेदारी पूरी करने के बाद वह पहली बार मुंबई लौट रहे हैं इस कारण हमारा उत्साह दोगुना हो गया है। ऐसे समय डॉ. बाबासाहेब का स्वागत भव्य तरीके से हो यह आप सबकी तीव्र