264 11-1-1950 विदेशियों की गुलामी अगर दुबारा झेलनी पड़े तो वह आत्मनाश ही होगा - मुंबई - Page 181

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इच्छा होगी और यह सहज भी है। यह बात ध्यान में रख कर ही मुंबई शहर और उपनगरों के शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन की शाखाओं ने दिनांक 1-1-1950 के दिन शीघ्र बैठक बुलाकर यह प्रस्ताव पारित किया।

‘‘भारतीय संविधान बनाने में प्रशंसनीय सफलता पाकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, भारतीय अस्पृश्य आंदोलन की जनमभूमि मुंबई नगरी में पहली बार आ रहे हैं। इसलिए उनका सार्वजनिक स्वागत किया जा रहा है और उनके कृतित्व के लिए अस्पृश्य जनता को महसूस होने वाली अपार खुशी के प्रतीक रूप भारतीय संविधान की प्रति उसी आकार के सोने में लपेट कर उन्हें अर्पण की जाएगी।’’

इस प्रस्ताव के अनुसार दिनांक 2 जनवरी, 1950 के दिन स्वागत समिति ने डॉ. बाबासाहेब से भेंट की। डॉ. बाबासाहेब और माईसाहब ने कृतार्थकर सार्वजनिक स्वागत समारोह में शामिल होने का आश्वासन दिया।

इस सम्मान समारोह में जो बातें जनता की जानकारी के लिए बताई जाएंगी वे इस प्रकार हैं

  1. स्वागत समारोह की जगह, दिनांक और समय के बारे में जानकारी डॉ.

बाबासाहेब अम्बेडकर की सुविधा के अनुसार तय कर जल्द ही परिपत्र नं 2

और जनता साप्ताहिक में प्रकाशित की जाएगी।

  1. स्वर्ण प्रतीक के लिए शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन मुंबई शहर और उपनगर

शाखा के सभी वार्डों में से पुराने सदस्यों से और जिनके नाम प्रकाशित किए

गए हैं उन नए सदस्यों से प्रत्येक से 3 रु. सहयोग राशि के रूप में लिए

जाएंगे जो उन्हें दिनांक 5 जनवरी, 1950 से पहले देने होंगे।

इसके अलावा मुंबई के हर अस्पृश्य बंधु-भगिनी से कम से कम चार आने देने का अनुरोध है।

स्वागत समिति ने चार आनों के टिकट छापे हैं। इन टिकटों पर नंबर और शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन मुंबई शहर और उपनगर शाखा के महासचिव के हस्ताक्षर के मुहर लगे होंगे। बिना टिकट लिए कोई भी पैसे ना दें। इस प्रकार के टिकट जिनके पास होंगे वे ही पैसा इकठ्ठा करने वाले अधिकृत व्यक्ति हैं। उनसे ही टिकट खरीदने में कोई हर्ज नहीं है। चार आनों से अधिक रकम अगर कोई दे तो उसे धन्यवाद सहित स्वीकार किया जाएगा। हालांकि जितनी रकम देंगे उसकी रसीद जरूर लें।

  1. स्वयंसेवकों के जत्थे, डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को अर्पण की जाने वाली फूलमालाएं और पुष्पगुच्छों के बारे में फेडरेशन के केंद्रीय दफतर में जानकारी मिलेगी।

घोषणा के अनुसार 11 जनवरी, 1950 के दिन दलितों के सर्वश्रेष्ठ नेता डॉ. बाबासाहेब