164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
टेक कर तो कोई तीर-कमानों की तरह खड़े होकर फलैश लाईट डालकर डॉक्टर साहब के फोटो ले रहा था। दृश्य सचमुच बड़ा ही मनोहारी था।
महासचिव का भाषण
मुंबई शहर और उपनगर शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के महासचिव आयु. जे. जी. भातनकर के संक्षिप्त भाषण से समारोह की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा-
‘‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का हम सभी दलित भाई-बहनों को दर्शन का सुअवसर मिले ऐसी हम सबकी बहुत दिनों से इच्छा थी। हालांकि, डॉक्टर साहब के कई जरूरी काम लगे रहते हैं इसलिए आज तक यह संयोग साकार नहीं हो पाया था। संविधान निर्माण का काम निश्चित तौर पर गर्व महसूस करने योग्य है। उनका स्वागत के अवसर के कारण ही आज हमें उनके दर्शन हो रहे हैं। इसके लिए हम उनके प्रति हमेशा कृतज्ञ हैं।’’
उनके बाद समारोह के अध्यक्ष आयु. डी. पी. गंब्रे इन्होंने पहले डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमाला अर्पण की उसके बाद सोने का बक्सा और दो हजार रुपयों की राशि दी। इस प्रसंग की तस्वीरें लेने के लिए एक बार फिर फोटोग्राफरों में होड़ लगी। सोने का बक्सा अर्पण करने का कार्यक्रम पूरा होने के बाद डॉ. बाबासाहेब और माईसाहेब को कई संस्थाओं और व्यक्तियों की ओर से फूलमालाएं पहनाई गईं। मंच पर मालाएं-पुष्पगुच्छों का ढेर लगा हुआ था।
अंत में, तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भाषण के लिए
खड़े हुए।
उन्होंने कहा,
प्रिय बहनों और भाइयों,
आज के कार्यक्रम में आने के लिए पहले मैं तैयार नहीं था। क्योंकि मुंबई आने के बाद जो कार्य निपटाने थे वे बहुत महत्वपूर्ण थे। उन कार्यों के मध्य में आज के कार्यक्रम के लिए समय निकाल पाना मुश्किल लग रहा था। लेकिन आज यहां इतने लोग इकठ्ठा हुए हैं यह देखकर तथा मुझे देने के लिए आपने जो यह बक्सा बनाया है उसे देखकर मुझे लग रहा है कि आज अगर मैं यहां उपस्थित नहीं रहता तो इतने बड़े जन समुदाय को निराश कर देता। इतना ही नहीं आपके द्वारा खर्च किया गया पैसा बेकार चला गया ऐसा लगता। इसलिए आज आप लोगों को आनंद हुआ ही होगा और मेरी नजर में भी यह बात संतोषजनक, आनंददायी और समयोचित ही है। (तालियां)
आज आप लोगों ने सभा का आयोजन किया और मुझे यह सोने का बक्सा दिया, असल में यह सब करने की वैसे कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। मेरी अध्यक्षता में और मेरे नेतृत्व में कई दिनों से कोई सभा नहीं हुई थी और मुझे भी आप लोगों से दो