266 2-5-1950 भारत देश की महानता बौद्ध धर्म के कारण है - नई दिल्ली - Page 190

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उनके लिए मददगार साबित हो ऐसा कुछ होना जरूरी है, ऐसा मुझे लगता है।

कुछ दिनों पूर्व कुछ युवाओं ने मेरा जन्मदिन मनाने की बात कही। उन्होंने उस कार्यक्रम में मुझे उपस्थित रहने के लिए कहा, लेकिन मैंने उनका आमंत्रण स्वीकार नहीं किया। मेरी गैरहाजिरी के कारण कई लोगों को निराशा हुई होगी। लेकिन उसका मुझे बुरा नहीं लगा। क्योंकि मुझ जैसे आम आदमी का जन्मदिन मना कर किसी को क्या मिलता? आपसे मुझमें अलग क्या बात है? मुझसे आपमें इन्सानियत क्या कम है? मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। कुछ लोगों को अपना जन्मदिन मनाना अच्छा लगता होगा, मुझे अपना जन्मदिन मनाना पसंद नहीं है, इसीलिए मैंने उन युवकों को भगवान बुद्ध का जन्मदिन मनाने के लिए कहा और इसीलिए अपने सभी काम एक ओर रख कर मैं आया हूं।

हमारे देश के लोग भगवान की पूजा करते हैं। रामजयंती, कृष्णजयंती मनाना उन्हें अच्छा लगता है। राम-कृष्ण जयंती के कार्यक्रमों में मैं हजारों को शामिल होते हुए देखता हूं। लेकिन भगवान बुद्ध के जयंती समारोह में 100 लोग भी बड़ी मुश्किल से दिखाई देते हैं। बुद्ध विहारों में मैं जाता हूं तब मुझे यह फर्क दिखाई देता है। राम अथवा कृष्ण की जयंती लोग क्यों मनाते हैं? क्योंकि, लोगों को लगता है कि वे भगवान हैं। धर्मशास्त्रों का मैं कोई बड़ा पंडित नहीं हूं, हालांकि जो धार्मिक साहित्य मैंने पढ़ा है उसके आधार पर मैं यह कहना चाहता हूं कि भगवान के पद पर आसीन व्यक्ति के विचारों का पवित्र होना जरूरी होता है। ऐसे व्यक्ति के मन में किसी और के प्रति द्वेषभावना नहीं होनी चाहिए, उसके मन में कोई स्वाद्रित के विचार नहीं होने चाहिए और किसी के प्रति बैर भावना उसके मन में नहीं होनी चाहिए। उनके कारण किसी का नुकसान नहीं होना चाहिए।

अब, क्या इन कसौटियों पर राम और कृष्ण खरे उतरते हैं? पहले राम के बारे में जानते हैं। राम क्या सचमुच भगवान थे? दो-तीन वजहों से राम को भगवान नहीं माना जा सकता।

जिस वक्त राम सीता और लक्ष्मण के साथ वन में रहता था उस वक्त उसने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काटी। देवपुरुष क्या कभी ऐसा काम कर सकते हैं? यह पहली वजह है। बाली और सुग्रीव के बीच बेवजह राम ने दखलंदाजी की। इतना ही नहीं, बाली पर उसने पत्नी और राज्य सुग्रीव के हवाले करने की जबरदस्ती की। देवपुरुष क्या कभी ऐसा काम कर सकते हैं? यह हुई दूसरी वजह। किसी धोबी ने सीता के चरित्र के बारे में बुरा कहा इसलिए राम ने सीता का त्याग किया। ऐन दुपहरी के समय सीता को जंगल में छोड़ने का आदेश लक्ष्मण को देने वाला राम क्या सचमुच भगवान था? सीता के बारे में उसने दस सालों तक कोई खबर नहीं ली, इसलिए उसके पास बिना लौटे सीता को धरतीमाता की शरण लेकर आत्महत्या करनी पड़ी। जिस राम को लोग भगवान मानते हैं उसका चरित्र ऐसा था।