266 2-5-1950 भारत देश की महानता बौद्ध धर्म के कारण है - नई दिल्ली - Page 191

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब कृष्ण के बारे में देखते हैं। महाभारत के युद्ध में प्रमुव व्यक्ति था कृष्ण और अगर उसने अपनी कूटनीति नहीं दिखाई होती तो शायद कौरव-पांडव बंधुओं के बीच का यह युद्ध पैदा ही नहीं होता। कृष्ण ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काया और उनके युद्ध की अग्नि में आग दी। किसी के पास फलां चीज मांगने जाना ऐसा वह एक पक्ष से कहता और दूसरे से कहता कि जो आएगा उसकी बात नहीं मानो।

क्या ऐसी बातें भगवान के या पवित्र व्यक्ति के हाथों होंगी? फिर हम कृष्ण को भगवान का स्थान कैसे दे सकते हैं? मैं यह सब झूठ नहीं बता रहा। महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में ही कृष्ण की इन करतूतों का वर्णन है। तुम्हारी मां अगर तुम्हें नंगा देखेगी तो तुम्हारा शरीर वज्र का बनेगा ऐसा किसी ने दुर्योधन से कहा। इस बात का पता चलते ही कृष्ण गांधारी के घर गया। दुर्योधन जब घर के लिए निकला तब कृष्ण ने उससे उसकी नग्नावस्था के बारे में पूछा और सलाह दी कि वह अपना शरीर ढंके। गांधारी ने दुर्योधन के शरीर का जितना हिस्सा देखा उतना हिस्सा वज्र-सा बना। यह बात केवल श्रीकृष्ण को पता थी। उसने सबसे कहा, इसी रहस्य के सहारे भीम ने दुर्योधन पर हमला किया और उसे मार डाला।

दुर्योधन की मृत्यु का रहस्य श्रीकृष्ण को पता था। अर्जुन की मृत्यु को टालने के लिए कृष्ण ने षड्यंत्र रचा द्रोणाचार्य का बेटा अश्वात्थामा जब युद्धस्थल पर लड़ रहा था तब श्रीकृष्ण ने द्रोणाचार्य को गलत जानकारी दी। उसने धर्मराज को ‘नरो वा कुंजरो’ कहने पर विवश किया। कृष्ण के इस धोखे के कारण शिशुपाल को इतना गुस्सा आया कि भरे दरबार में उसने श्रीकृष्ण को गालियां सुनाईं। शिशुपाल की निर्भयता से भगवान भी खुश हुए। कृष्ण को भला-बुरा सुनाने के लिए उस पर खुले आम पुष्प वृद्धि हुई। कृष्ण भगवान नहीं था। इतना ही नहीं, वह आम लोगों से भी हीन था। इस बात को साबित करने के लिए ऐसे अन्य भी कई उदाहरण दिए जा सकते हैं।

इसीलिए हम बुद्ध जयंती मना रहे हैं और मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अभी हिंदू धर्म की तरह बौद्ध धर्म का भारत में प्रसार नहीं हुआ है लेकिन आजादी के बाद लोगों का रुझान बौद्ध धर्म की ओर हो रहा है। पल भर के लिए सोचिए कि करीब 2500 सालों के बाद यहां बुद्ध जयंती मनाई जा रही है। आज तक बौद्ध धम्म उपेक्षित रहने के बावजूद बुद्ध जयंती मनाई जाती है। इस बात को कौन असामान्य नहीं कहेगा? आजादी के बाद, जिसे हम अपना कह सकेंगे ऐसे दर्शन की हमें जरूरत होगी। हिंदू संस्कृति में हमने खूब ढूंढा। लेकिन उसमें हमें कुछ नहीं मिला। केवल बौद्ध धर्म में ही सच्चे ज्ञान की किरण दिखाई देती है और बौद्ध धर्म के कारण ही हम दुनिया से कह सकते हैं कि भारत देश महान है।

हमारे राष्ट्रध्वज पर बुद्ध का चक्र है। हमारी राजमुद्रा बौद्ध दर्शन पर अधिष्ठित है।