266 2-5-1950 भारत देश की महानता बौद्ध धर्म के कारण है - नई दिल्ली - Page 192

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साथ ही, नए भारतीय संधान के अनुसार हमारे राष्ट्राध्यक्ष का जब पदासीन किया गया तब बुद्ध की मूर्ती को ही श्रेष्ठ माना गया।

किस प्रकार हिंदू धर्म अन्य धर्मों से श्रेष्ट है क्या हिंदू लोग इस बात का जवाब दे सकते हैं? अस्पृश्यों का जीवन बरबाद करने की ताकत हिंदू धर्म में है क्या इसी कारण हिंदू धर्म को श्रेष्ट कहा जाए? किसी अस्पृश्य द्वारा पवित्र शब्दों का उच्चारण किया जाए तो उसकी जीभ काटना क्या यही श्रेष्ट धर्म है? उबलता शीशा अस्पृश्यों के कान में उंडेलने के लिए कहने वाला हिंदू धर्म क्या धर्म की संज्ञा पाने के भी योग्य है?

आपको इन सवालों के जवाब देने ही होंगे। कौन-सा धर्म अच्छा और कौन-सा धर्म बुरा यह आपने अब तक पहचाना ही होगा। जिन्हें, विचार, शिक्षा और आजादी नहीं मिल पाई वे हिंदू धर्म को मानेंगे कैसे? इस धर्म ने शूद्रों को ब्राह्मण, क्षत्रीय और वैश्यों की केवल चाकरी करने के लिए ही कहा गया है।

आश्चर्य की बात यह है कि ब्राह्मण कभी शासक नहीं बने। शासन करने वाले लोग नरक में जाते हैं यह धारणा थी ब्राह्मणों की। ब्राह्मणों को नरक से बड़ा डर लगता है। इसीलिए ब्राह्मणों ने क्षत्रियों को राज करने दिया। तब इस सौदे में शूद्र और अस्पृश्य कैसे भागीदार होंगे? अस्पृश बनकर ही हिंदू धर्म में रहना है या धर्म बदलना है इस बात पर सोचने का समय अब आ चुका है। मेरी मानो तो, मुझे हिंदुओं का घमण्ड और विषमता बिल्कुल पसंद नहीं है। बौद्ध और हिंदू धर्म में बहुत फर्क है। बौद्ध धर्म जातिविहीन एक समान समाज रचना को मानता है जबकि हिंदू धर्म की नींव ही जातियों पर आधारित है। हिंदुओं की जातियों के बीच न टूटने वाली दीवारें बना कर उन्हें विभाजित किया गया है।

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि हर व्यक्ति को, समाज को और सरकार को भी धर्म की जरूरत है। सच्चे धर्म के बगैर किसी की प्रगति संभव नहीं। इसीलिए कौन-सा धर्म श्रेष्ठ है, अपनाने योग्य है इसका फैसला आपको करना होगा। मैं आपसे कह रहा हूं कि आप बौद्धवाद और ब्राह्मणवाद के बीच का फर्क ध्यान में रखें। इनमें से एक को आपको चुनना होगा। बुद्ध एक मानव था। बुद्ध के सिद्धांत जातिवाद के विरुद्ध थे। बुद्ध आम लोगों के बीच रहा और मानवीय दृष्टिकोण से लोगों के दुख दूर करने की उसने कोशिश की। इसलिए आजसे अपने लिए कौन-सा धर्म ठीक रहेगा इस बारे में आपको फैसला करना होगा। इस बात की निश्चित रुप से आपको आजादी है।