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से राज्य के शासन पर अपना प्रभाव डाला करते थे। इस प्रभाव का उपयोग कर उनकी वर्चस्व में बाधा पहुंचाने वाले बौद्ध को उखाड़ फेंकने की वे कोशिश किया करते थे। सम्राट अशोक के समय कुलदेवता की पूजा की निंदा की गई। अशोक कहता है, ‘मैं बौद्ध के मार्ग का अनुसरण कर रहा हूं इसलिए अन्य किसी देवी-देवताओं की पूजा करने की मुझे जरूरत नहीं है।’ और उसने अपने प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश देकर कुलदेवताओं की मूर्तियां हटवा दीं। यह ब्राह्मणों के लिए बहुत बड़ा आघात था। क्योंकि इससे उनकी आजीविका और भ्रामक प्रचार पर लगाम कस गई। इसलिए वे इस बात का बदला लेने के लिए सिद्ध हुए। पहले ब्राह्मण पुरोहित मानते थे कि सभी राजा मरने के बाद नर्क में जाते हैं। क्योंकि राज्य चलाते हुए उन्हें कई पापकृत्य करने पड़ते हैं। इसीलिए, मौका पाने के बावजूद राज्य चलाने की जिम्मेदारी ब्राह्मण अपने सिर पर लेने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, राजसिंहासन पर बैठने के लिए वे राजी नहीं होने के बावजूद मंत्री अथवा पुरोहित के तौर पर राजा को सलाह देने का काम किया करते थे। साथ ही वे कानून भी बनाते थे। लेकिन कुलदेवता की पूजा बंद होने के कारण जब उनकी बहुत बड़ी हानि हुई तब राज्य का शासन न चलाने के अपने सिद्धांत का त्याग कर वह राज्य पर और सिंहासन पर कब्जा करने की कोशिश उन्होंने शुरू की। भारतीय साहित्य में इस प्रकार की अनेक घटनाओं के जिक्र हैं। कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि जहां अपने बलबूते राज्य करना संभव नहीं था वहां अपनी तरफ झुकाव रखने वाले क्षत्रियों को साथ लेकर या उन्हें आगे कर यानी कि उन्हें कठपुतली बना कर वे शासन चलाया करते थे। इस प्रकार एक बार फिर ब्राह्मणवाद ने जोर पकड़ा तो बौद्ध धर्म पर आघात हुआ और भारत से लोप होने के लिए कारण बना।
ब्राहमणों के शासन अधिकार की एक बहुत बड़ी घटना मौर्य साम्राज्य के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार दिखाई देती है। वेद की बात यह है कि भारतीय इतिहासविदों ने इस महान घटना को महत्व नहीं दिया। वस्तुतः भारतीय इतिहास की यह सबसे बड़ी घटना है। अंतिम मौर्य सम्राट महाराज बृहद्रथ का सेनापति पुष्यमित्र नाम का एक ब्राह्मण था। पतंजलि उसके गुरु थे। पतंजलि ने बौद्धों से ही योगविद्या सीखी थी। लेकिन बाद में वह बौद्धों का शत्रु बना। उसकी सलाह को मानकर सेनापति शृघ्गवंसीय पुष्यमित्र ने बृहद्रथ की हत्या की और मौर्य वंश की जगह शृघ्गवंश के नाम से ब्राह्मणों का राज चलाया।
इस ब्राह्मण राज्य ने बौद्ध धर्म को अत्यधिक नुकसान पहुंचाया। ब्राह्मण धर्म की पुनर्स्थापना के लिए किए गए कार्यों में से यह सबसे दारुण कृत्य था और भारत से बौद्ध धर्म के नष्टप्राय होने के लिए कारण बनी यह सबसे बड़ी ऐतिहासिक घटना थी।
यह भी माना जाता है कि, भारत से बौद्ध धर्म का लोप होने के लिए विदेशी आक्रमण भी कारण बने। लेकिन यूनानी लोगों के आक्रमणों के कारण बौद्ध धर्म को