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हिंदुओं की विशेष हानि नहीं हुई। बाद के समय पिछड़े वर्ग के लोगों को भिक्षु बनाकर बौद्धों की परंपरा कायम रखने की कोशिश की गई। लेकिन अच्छी तरह से शिक्षित न होने के कारण ये भिक्षु ब्राह्मणों के युक्तिवाद का जवाब नहीं दे पाए और इसी कारण उनकी हार हुई।
दरमियान के समय में शैव योगियों ने शैव धर्म का और ब्राह्मणों ने वैष्णव धर्म का प्रसार किया। वैष्ण और शैवों में जोरदार संघर्ष हुआ। आखिर ब्राह्मणों ने शैवों को ‘रुद्र’ बना कर अपने साथ शामिल कर लिया। इस प्रकार शैव और वैष्णवों में एकता हुई। आगे हिंदु धर्म में कई बदलाव हुए। पहले वह हिंसा की सीख देता था लेकिन अब वह अहिंसा की सीख देता है। बौद्ध धर्म के कई तत्व हिंदु धर्म ने अपनाए। प्रतिमा, चैत्य, विहार और भिक्षु आदि दृष्टिकोणों से आज भारत में बौद्ध धर्म के न होते हुए भी हिंदू धर्म सैद्धांतिक रूप में भारतभर में फैला हुआ है।