269 6-6-1950 बौद्ध धर्म ब्राह्मण धर्म के लिए चुनौती है - कोलंबो - Page 201

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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बौद्ध धर्म ब्राह्मण धर्म के लिए चुनौती है

अब पूरी मानव जाति के लिए ‘नैतिक मूल्यों का सवाल’ बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। सांस्कृतिक संघर्ष, युद्ध की भाषा, धर्म का ”ास के विषाक्त वलय में पूरी मानव जाति फंसी है। वैचारिक अराजकता की तो सारी हदें लांघ दी हैं।

ऐसे, बेहद आपातकालीन समय में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा बौद्ध धर्म का विवेचन करते हुए कोलंबो में जिस धर्मवाणी का उपदेश किया उससे सभी देशों की और

खास कर भारत की जनता को सच्चा प्रकाश दिखाई देगा और माना जा सकता है कि सच्चे नैतिक मूल्यों का महत्व पहचाना जाएगा।

भारत में बौद्ध धर्म का उदय और अस्त विषय पर कोलंबो के यंग मेन्स बुद्धिस्ट एसोसिएशन में छात्रों के सामने 6 जून, 1950 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का विचार प्रवर्तक और क्रांतिकारी भाषण हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा-

भारत में बौद्ध धर्म का ”ास हुआ है और वह धर्म लगभग समाप्त हो चुका है ऐसा कहा जाता है लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। कुछ देर के लिए मैं मान भी लूं कि, आज भारत में बौद्ध धर्म के प्रसार के ऐहिक चिन्ह दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन इसके बावजूद आध्यात्मिक शक्ति के तौर पर भारत में आज भी बौद्ध धर्म का ज्वलंत प्रभाव है इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। वेद की बात यह है कि इसके बावजूद बौद्ध धर्म का उदय कैसे हुआ? अस्त कैसे हुआ? इन प्रश्नों पर आज तक जितना विचार होना चाहिए था वह नहीं हुआ। बौद्ध धर्म का महत्व ध्यान में रखें तो इस विषय का अध्ययन ठोस वास्तविकताओं की पृष्ठभूमि और गहराई से होना चाहिए। इस तरह के अध्ययन का महत्व आज भारत में अधिक है। इस विषय पर अधिकृत जानकारी देने वाले ग्रंथ अथवा अन्य साहित्य उपलब्ध न होना भी एक समस्या है।

जो लोग चाहते हैं कि बौद्ध धर्म पुनर्जीवत हो उनके सामने यह सवाल वड़ा रहता है कि अगर बौद्ध धर्म में कुछ चिरंतन मूल्य थे तो इस धर्म का ”ास क्यों हुआ? इस बारे में जानकारी प्राप्त करने की मेरी कोशिश जारी है। अब तक जो जानकारी मैं जुटा पाया हूं उसके आधार पर बौद्ध धर्म के उदय-अस्त के बारे में मैंने जो अनुमान लगाए हैं वे, मुझे लगता है कि सही हैं।

जनताः 10 जून, 1950