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ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि भारत में शुरू से हिंदू धर्म ही था। लेकिन इतिहास के आधार पर इस की छान-बीन की तो इस मान्यता का कोई आधार दिखाई नहीं देता। हिंदू धर्म भारत में शुरु से नहीं था। आज हिंदू धर्म की स्थिति देखें तो पता चलता है कि वह काफी बाद में भारत में पैदा हुआ है। हिंदू धर्म का निर्माण कई बदलावों से होकर हुआ है। पहले भारत में वैदिक धर्म था। उसके बाद ब्राह्मण धर्म आया। और अब हिंदू धर्म निर्माण हुआ है। इस प्रकार के बदलाव होते रहे हैं।
ब्राह्मण धर्म के दौरान ही भारत में बौद्ध धर्म का उदय हुआ। और वह स्वाभाविक था। ब्रह्मण धर्म की आत्मा विषमता पर आधारित थी। बौद्ध धर्म की आत्मा समानता की थी। जाहिर है कि इन दो विपरीत विचार प्रणाली के धर्मों में संघर्ष होना स्वाभाविक ही है। बौद्ध धर्म ब्राह्मण धर्म के लिए चुनौती समान था क्योंकि बौद्ध धर्म का चातुर्वर्ण्य पद्धति को विरोध था। फ्रेंच राज्यक्रांति द्वारा समानता स्थापित करने का जो कार्य किया गया वही क्रांतिकारी कार्य बौद्ध धर्म के उदय से हुआ। इस प्रकार बौद्ध धर्म का उदय किन स्थितियों में हुआ जानने के बाद ही उसका महत्व समझ में आएगा।
कई लोगों का कहना है कि शंकराचार्य के दर्शन और युक्तिवाद के कारण बौद्ध धर्म निष्प्रभ हुआ। लेकिन मुझे यह बात गलत लगती है। क्योंकि शंकराचार्य की मृत्यु के बाद भी कई सालों तक बौद्ध धर्म भारत में प्रचलित था, उसका विकास हो रहा था। कई बार मुझे लगता है कि शंकराचार्य और उनके गुरु भी बौद्धधर्मीय ही थे।
वैष्णव धर्म और शैव धर्म के तड़क-भड़क वाले प्रचार के कारण बौद्ध धर्म धीरे-धीरे अस्त हुआ। बौद्ध धर्म की ही इन धर्मों ने नकल की थी। नकल करते हुए बौद्ध धर्म को
खत्म करने की यह जुगत और थी। मुसलमानों के आक्रमण भी कारण बने। अलाउद्दीन खिलजी ने जब बिहार पर आक्रमण किया तब उसने करीब 5000 से 6000 बौद्ध भिक्षुओं को मार डाला। उससे बनी दहशत के कारण बचे हुए बौद्ध भिक्षु चीन, नेपाल और तिब्बत में भाग गए। उसके बाद भी बौद्ध धर्म को पुनर्जीवित करने की कोशिशें हुईं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। क्योंकि, इस बीच हिंदू धर्म का प्रसार हुआ था और करीब 90 प्रतिशत लोगों ने हिंदु धर्म अपनाया था।
हिंदू धर्म का आचरण आसान है इसलिए यह धर्म टिका रहा और बौद्ध धर्म का आचरण कठिन था, इसलिए वह लोप हुआ यही इसका सीधा-सरल जवाब है। इसके अलावा भारत का राजनीतिक वातावरण जिस प्रकार हिंदू धर्म के लिए अनुकूल था उस प्रकार बौद्ध धर्म के लिए अनुकूल नहीं था इस बात को ध्यान में रखना बहुत जरुरी है।