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का सिद्धांत चाहते हैं और आर्थिक दासता से मुक्ति चाहते हैं तो बौद्धवाद के अलावा अन्य कहीं ठौर नहीं।
सिलोन के सम्माननीय नागरिक बनने का मौका आपको कानूनी तौर पर मिला हुआ है। यह बात भी सही है कि इस कानून के कुछ अनुच्छेदों के खिलाफ शिकायत करने की कई जगहें हैं। लेकिन, मुझे यकीन है कि भारत सरकार और सिलोन सरकार के आपसी सहयोग से, स्नेहभाव से अन्यायकारी प्रावधानों का निवारण किया जा सकता है।’’